प्रयागराज अर्बन सीलिंग केस में 36 साल बाद कब्जे का दावा खारिज, हाईकोर्ट ने याचिका की निरस्त

प्रयागराज अर्बन सीलिंग केस में 36 साल बाद कब्जे का दावा खारिज, हाईकोर्ट ने याचिका की निरस्त

प्रयागराज अर्बन सीलिंग केस में 36 साल बाद कब्जे का दावा खारिज, हाईकोर्ट ने याचिका की निरस्त

प्रयागराज, 26 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1976 के अर्बन लैंड सीलिंग एक्ट के तहत 1990 में ही कब्जा ले लिए जाने वाले मामले में 24 साल बाद दाखिल याचिका को खारिज कर दिया।

कोर्ट ने कहा नोटिस 25.मई 1990 को मूल भू-स्वामी सरजू प्रसाद को तामील हुआ, उनके दस्तखत हैं, 21 नवंबर 1990 को कब्जा ले लिया गया। 04जनवरी 1996 को राजस्व रिकॉर्ड में अर्बन सीलिंग दर्ज हुआ। 1999 का एक्ट लागू होने से बहुत पहले कार्यवाही पूरी हो चुकी, अब कब्जा वापस नहीं मिलेगा। याची ने जरूरी फैक्ट भी छुपाए।

राधा देवी की याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव तथा न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान ने यह फैसला सुनाया। प्रयागराज के अरैल में 25,233.04 वर्ग मी. जमीन है। याची का दावा है कि मूल भू-स्वामी सरजू प्रसाद, है ,याची उनकी पुत्रवधू है जो कब्जे में है। उसे कोई नोटिस नहीं मिला और मुआवजा भी नहीं मिला। सरकारी कब्जा सिर्फ कागजी है। एक्ट 1999 से उसे जमीन मिलनी चाहिए।

याची के ससुर के वंशजों ने याचिका दाखिल किया। हाई कोर्ट ने जिलाधिकारी को 3 महीने में प्रत्यावेदन तय करने को कहा। जो खारिज कर दिया गया । कहा 10(5) की कार्यवाही 25.मई.1990 को पूरी हुई, कब्जा तत्कालीन इलाहाबाद विकास प्राधिकरण को ट्रांसफर हो गया।याची के पति श्याम बिहारी पांडे 1 नवंबर 2008 से लापता हैं।

सरकारी वकील ने कहा- सरजू प्रसाद ने धारा 6(1) में रिटर्न दाखिल किया । नोटिस विधिवत तामील है। सरजू प्रसाद के हस्ताक्षर हैं।

कोर्ट ने कहा ए डी ए ने कब्जा ले लिया । याची के पास खुद कब्जे में होने का कोई सबूत नहीं।

कोर्ट ने कहा याची ने जानबूझकर छुपाया कि सरजू प्रसाद ने खुद रेस्टोरेशन अर्जी दी थी, जिसमें माना था कि 16.जून.1990 को 10(5) नोटिस का पता चला। आरोप लगाया था कि 8(3) का नोटिस नहीं मिला। मूल भू-स्वामी को 1990 में ही ज्ञान था।1995 में रिकॉल खारिज, फिर भी जीवनभर कहीं चुनौती नहीं दिया। वंशज 2007 में 17 साल बाद पहली बार हाईकोर्ट आए। इसलिए देरी से आने पर मुकदमा खारिज कर दिया गया।

कोर्ट ने धारा 4 रिपील एक्ट का हवाला दिया -धारा 11,12,13,14 की कार्यवाही समाप्त नहीं होती, अगर कब्जा ले लिया गया हो। इसलिए मुआवजा नहीं मिला तो याची धारा 11 के तहत अलग से कार्यवाही कर सकती है। इस आधार पर कब्जा वापस नहीं मिलेगा।