संपत्ति विवाद को आपराधिक रंग देने का प्रथम दृष्टया मामला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

आठ साल तक मृतक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने का दावा; कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता से चार सप्ताह में मांगा जवाब

संपत्ति विवाद को आपराधिक रंग देने का प्रथम दृष्टया मामला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महिला की गिरफ्तारी पर लगाई रोक

प्रयागराज, 26 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लिव-इन रिलेशनशिप और संपत्ति के उत्तराधिकार को लेकर दर्ज आपराधिक मामले में आरोपी को बड़ी राहत दी है।

कोर्ट ने कहा मामला प्रथम दृष्टया सिविल विवाद को आपराधिक केस में बदलने का लगता है, इसलिए विवेचना पूरी होने तक गिरफ्तारी न की जाय।

साधना राय उर्फ अर्चना दुबे की याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट तथा न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।

कहा गया कि थाना नेवढ़िया, जिला जौनपुर में एफआईआर दर्ज कराई गई है। याची मृतक नागेश कुमार दुबे के साथ लगभग 8 साल से लिव-इन में रह रही थी, उनके मुश्किल समय और बीमारी में सेवा भी की। मृतक के अन्य वारिसों के साथ संपत्ति को लेकर विवाद है। उसी विवाद के चलते यह एफआईआर दर्ज कर सिविल मामले को आपराधिक रंग दिया गया है। याची को मृतक की संपत्ति पर दावे से बेदखल करने के लिए दुर्भावना से यह एफआईआर कराई गई है।

कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना और राज्य सरकार व शिकायतकर्ता से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने अगली सुनवाई या पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक, जो भी पहले हो, याची की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।