अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी दक्षता हासिल करें विद्यार्थी: प्रो. सरोज सिंह
सेंट जोसेफ कॉलेज के वार्षिक हिंदी दिवस कार्यक्रम ‘रजनीगंधा’ में महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान पर चर्चा; भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित
विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ हिन्दी में भी दक्षता हासिल करनी चाहिए : प्रो. सरोज सिंह
सेंट जोसेफ कॉलेज में ‘रजनीगंधा’ कार्यक्रम में महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर हुई चर्चा भाषण व वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेता सम्मानित
प्रयागराज, 24 अक्टूबर (हि.स.)। विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी भाषा में भी दक्षता हासिल करनी चाहिए। हिन्दी हमारी अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है और इसके साहित्य से विद्यार्थियों को संवेदनशीलता, विचारशीलता तथा जीवन-मूल्यों की सीख मिलती है। यह बातें सीएमपी कॉलेज के हिन्दी विभाग की अध्यक्ष प्रो. सरोज सिंह ने शनिवार को सेंट जोसेफ कॉलेज में आयोजित वार्षिक हिन्दी दिवस कार्यक्रम ‘रजनीगंधा’ में कहीं। कार्यक्रम छायावाद की प्रमुख कवयित्री महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर केंद्रित रहा।
कॉलेज के होगेन हॉल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य फादर वाल्टर डी. सिल्वा, कॉलेज संयोजक ज्योति दुबे, हिन्दी समिति के सभापति डॉ. मनोज कुमार सिंह, हिन्दी अध्यापक डॉ. राघवेंद्र द्विवेदी और हिन्दी समिति के अध्यक्ष रूद्र सिंह उपस्थित रहे। इसके बाद सौभाग्य नायक के निर्देशन में कॉलेज क्वायर ने सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की पंक्तियों ‘वर दे, वीणावादिनी वर दे’ के माध्यम से मां सरस्वती की वंदना की। कॉलेज क्वायर ने स्वागत गीत भी प्रस्तुत किया।
हिन्दी समिति के सभापति डॉ. मनोज कुमार सिंह ने ‘रजनीगंधा’ कार्यक्रम के इतिहास की जानकारी दी और विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने मुख्य अतिथि प्रो. सरोज सिंह का परिचय भी दिया। सादान खान ने महादेवी वर्मा के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। कॉलेज क्वायर ने कबीर, रहीम और वृंद के दोहों का गायन किया। हिन्दी समिति के महासचिव शाद अहमद ने महादेवी वर्मा की कविता ‘जाग तुझको दूर जाना है’ का प्रभावशाली पाठ किया। समिति के उपाध्यक्ष यथार्थ श्रीवास्तव ने उनके साहित्यिक योगदान और कृतित्व पर अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि प्रो. सरोज सिंह ने महादेवी वर्मा के साहित्य का गहन विश्लेषण करते हुए हिन्दी साहित्य में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने उनकी रचनाओं और साहित्यिक दृष्टि के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में कक्षा नौ और दस की भाषण प्रतियोगिता तथा कक्षा 11 और 12 की वाद-विवाद प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। कक्षा नौ की भाषण प्रतियोगिता में श्रीहम शुक्ला प्रथम, अरमान मेंहदी द्वितीय और मंत्रम अग्रवाल तृतीय रहे। कक्षा दस में अरॉन अंश रॉय ने प्रथम, अद्वित राजा राम ने द्वितीय और मोहम्मद अली हैदर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में पक्ष के सर्वश्रेष्ठ वक्ता प्रजीत श्रीवास्तव और सारांश जॉन रहे। विपक्ष के सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार यथार्थ श्रीवास्तव को मिला, जबकि सर्वश्रेष्ठ प्रश्नकर्ता सारांश जॉन रहे।
प्राचार्य फादर वाल्टर डी. सिल्वा ने मुख्य अतिथि प्रो. सरोज सिंह को शॉल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी समिति के अध्यक्ष रूद्र सिंह और संगठन सचिव देब चटर्जी ने किया। अंत में डॉ. राघवेंद्र द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों को मिष्ठान वितरित कर किया गया।
इस अवसर पर इलाहाबाद कैथोलिक धर्मप्रांत के बिशप लुईस मस्क्रेनहस को भी शामिल होना था, लेकिन यात्रा पर जाने के कारण वे कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके। आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम से पहले उनसे भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया गया था।