इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पेट्रोल पंप डीलरशिप रद्द होने पर ₹15.78 लाख मुआवजा देने का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पेट्रोल पंप डीलरशिप रद्द होने पर ₹15.78 लाख मुआवजा देने का आदेश
प्रयागराज, 21 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा गाजीपुर जिले में पेट्रोल पंप डीलरशिप के लिए जारी विज्ञापन और लेटर ऑफ इंटेंट को रद्द करने के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना किसी गलती के याचिकाकर्ता को हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है, क्योंकि यह तकनीकी त्रुटि पूरी तरह से पेट्रोलियम कंपनी की ओर से की गई थी।
मामला गाजीपुर में स्टेट हाईवे-99 पर महावीर मंदिर से भदौरा स्टैंड के बीच स्थित लोकेशन पर पेट्रोल पंप आवंटन से जुड़ा है। कंपनी ने 25 नवंबर 2018 को इसके लिए विज्ञापन निकाला था। लॉटरी के बाद शांतनु सिंह को एक फरवरी 2019 को सफल घोषित किया गया और 02 अगस्त 2019 को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया। शर्तों के तहत याचिकाकर्ता ने जमीन को रोड लेवल तक विकसित करने, चहारदीवारी बनाने और एनओसी प्राप्त करने में भारी निवेश किया।
हालांकि, 11 मार्च 2021 को कंपनी ने विज्ञापन और आवंटन रद्द कर दिया। कंपनी का तर्क था कि यह क्षेत्र छह मार्च 2018 की अधिसूचना के तहत पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया जा चुका था, जिससे विज्ञापन त्रुटिपूर्ण हो गया था। कोर्ट ने माना कि विज्ञापन रद्द करने का अधिकार कंपनी के पास था लेकिन याचिकाकर्ता की कोई गलती नहीं थी। याचिकाकर्ता ने कंपनी के भरोसे अपनी गाढ़ी कमाई खर्च की थी।
अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर माना कि याचिकाकर्ता ने 15 लाख 78 हजार 486 रुपये का निवेश किया था। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शक्तियों का उपयोग करते हुए कोर्ट ने कंपनी को निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को 15 लाख 78 हखार 486 रुपये की राशि मुआवजे के रूप में दे। भुगतान न होने पर आठ फीसदी वार्षिक साधारण ब्याज देना होगा। इस प्रकार न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर लिया।