पूर्व भाजपा विधायक संजय गुप्ता के मामले में हाईकोर्ट की रोक, विकास गुप्ता के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही स्थगित
2021 में दर्ज आपराधिक धमकी के मुकदमे में मजिस्ट्रेट के समन आदेश पर भी रोक, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पूर्व विधायक से मांगा जवाब; अगली सुनवाई 9 दिसंबर को
प्रयागराज, 09 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चायल (कौशाम्बी) के पूर्व भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता द्वारा दर्ज कराई गई एक एफआईआर के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने याचिकाकर्ता विकास गुप्ता उर्फ विकास कुमार गुप्ता के खिलाफ प्रयागराज के कैंट थाने में दर्ज मुकदमे की पूरी आपराधिक कार्यवाही और मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने विकास गुप्ता की धारा 528 बीएनएसएस (BNSS) के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार (पुलिस विभाग) और शिकायतकर्ता पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर 2026 को तय की गई है।
मामला साल 2021 का है, जब तत्कालीन सिटिंग विधायक संजय कुमार गुप्ता के आधिकारिक लेटरहेड पर विकास गुप्ता के खिलाफ प्रयागराज के कैंट थाने में एफआईआर नंबर 0033/2021 आईपीसी की धारा 506 (अपराधिक धमकी) के तहत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विकास गुप्ता संपत्ति विवाद सुलझाने के लिए विधायक के आवास पर आए थे और उन्होंने वहां की बातचीत की मोबाइल से रिकॉर्डिंग की ताकि विधायक की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके।
कोर्ट में याचिकाकर्ता की दलीलें
विकास गुप्ता के वकील शचिन्द्र कुमार मिश्रा ने अदालत में दलील दी कि यह पूरा मामला पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और मनगढ़ंत है। याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
धारा 506 आई पी सी का कोई आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट के 'मानिक तनेजा बनाम कर्नाटक राज्य' मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि सिर्फ मोबाइल रिकॉर्डिंग करने या बहस होने से धारा 506 (आपराधिक धमकी) का अपराध नहीं बनता। शिकायत में ऐसी कोई बात नहीं है जिससे किसी भी प्रकार की जान-माल की धमकी की पुष्टि होती है।
पारिवारिक विवाद में विधायक का हस्तक्षेप: याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनका अपने बड़े भाई और भाभी के साथ संपत्ति का निजी पारिवारिक विवाद है। भाभी के चाचा होने के नाते पूर्व विधायक संजय गुप्ता ने अपने राजनीतिक रसूख का गलत इस्तेमाल करते हुए दबाव बनाने के लिए यह झूठी एफआईआर दर्ज कराई।
जांच में भारी देरी और अनियमितता: पुलिस ने मार्च 2021 में ही चार्जशीट (नंबर 59/2021) तैयार करने का दावा किया था, लेकिन इसे 5 साल तक दबाकर रखा गया। जब याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की, तब जाकर पुलिस ने आनन-फानन में 28 जुलाई 2026 को कोर्ट में चार्जशीट पेश करने की गुहार लगाई और 20 अगस्त 2026 को निचली अदालत ने बिना दिमाग लगाए संज्ञान लेते हुए समन जारी कर दिया।
• मौलिक अधिकारों का हनन: 5 साल से अधिक समय तक जांच और चार्जशीट को लटकाए रखना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिक के 'स्पीड ट्रायल' (त्वरित न्याय) के मौलिक अधिकार का सीधा उल्लंघन है।