पुनर्विवाह के बाद भी भाभी का NOC जरूरी, शस्त्र लाइसेंस ट्रांसफर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला
मृत भाई के शस्त्र लाइसेंस को अपने नाम कराने की याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा- अन्य कानूनी वारिस की अनापत्ति के नियम में छूट का प्रावधान नहीं
प्रयागराज, 09 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि मृत लाइसेंसधारी के शस्त्र लाइसेंस को उसके वारिस के नाम ट्रांसफर करने के लिए अन्य कानूनी वारिसों की अनापत्ति अनिवार्य है और इस शर्त में ढील नहीं दी जा सकती।
न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने मंगल उर्फ मंगलेश्वर की याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता के बड़े भाई के नाम शस्त्र लाइसेंस जारी था। उनके निधन के बाद याचिकाकर्ता ने शस्त्र नियम, 2016 के नियम 25 के तहत लाइसेंस अपने नाम ट्रांसफर कराने का आवेदन दिया। मृतक भाई की पत्नी से अनापत्ति न मिल पाने के कारण आवेदन निरस्त कर दिया गया और अपील भी खारिज हो गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
अधिवक्ता ने कहा कि मृतक की पत्नी ने पति की मृत्यु के बाद दोबारा विवाह कर लिया है, इसलिए वह शपथ पत्र या अनापत्ति देने से इन्कार कर रही है। ऐसी परिस्थिति में इस शर्त को नज़र अंदाज़ कर लाइसेंस ट्रांसफर किया जा सकता है।
अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने कहा कि नियम 25(2)(i) के तहत शेष कानूनी वारिसों की अनापत्ति अनिवार्य प्रावधान है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि नियम 25(2)(i) के अनुसार ऐसी परिस्थितियों में मृत लाइसेंसधारी के शेष कानूनी वारिसों की अनापत्ति घोषणा आवश्यक है। यह निर्विवाद है कि याचिकाकर्ता ने मृतक भाई की पत्नी की अनापत्ति प्रस्तुत नहीं की। केवल इस आधार पर कि पत्नी ने पुनर्विवाह कर लिया है, निर्धारित शर्त को कमजोर नहीं किया जा सकता, क्योंकि ऐसी किसी शर्त में ढील देने का कोई प्रावधान नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता नियम 25 के तहत लाइसेंस ट्रांसफर की शर्तें पूरी करने में विफल रहा है, तो सर्टिओरारी की रिट जारी नहीं की जा सकती। इसी के साथ याचिका खारिज कर दी गई।