आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा समावेशी शिक्षा का प्रशिक्षण, योगी सरकार ने तेज की तैयारी
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलेगा समावेशी शिक्षा का प्रशिक्षण, योगी सरकार ने तेज की तैयारी
लखनऊ, 12 अगस्त। हर बच्चे की सीखने की अपनी गति और जरूरत होती है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समय पर पहचान, शुरुआती सहयोग और अनुकूल शैक्षिक वातावरण उनकी आगे की शिक्षा को मजबूत आधार दे सकता है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को समावेशी शिक्षा की शुरुआती कड़ी के रूप में और मजबूत कर रही है। प्रदेश के 75 जिलों में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्त्रियों के साथ प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान, शुरुआती हस्तक्षेप, समावेशी आंगनबाड़ी केंद्र और दिव्यांगता समावेशन जैसे विषयों पर विशेष जोर रहेगा।
राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय, समग्र शिक्षा की ओर से प्रशिक्षण के लिए लगभग 2.98 करोड़ रुपये की लिमिट जारी की गई है। इसमें मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण के लिए 17.70 लाख रुपये तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों के प्रशिक्षण के लिए 2.80 करोड़ रुपये शामिल हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य जमीनी स्तर पर कार्यरत कार्मिकों की क्षमता बढ़ाना है, ताकि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की जरूरतों को शुरुआती स्तर पर पहचानकर उन्हें उचित सहयोग और आगे की शिक्षा के लिए तैयार किया जा सके।
पहले तैयार होंगे मास्टर ट्रेनर्स
प्रशिक्षण की व्यवस्था जिला स्तर से शुरू होगी। 3 अगस्त से 30 अगस्त तक जिला स्तर पर एआरपी को मास्टर ट्रेनर्स के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये मास्टर ट्रेनर्स आगे ब्लॉक स्तर पर प्रशिक्षण का नेतृत्व करेंगे। प्रशिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण सामग्री और तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। प्रशिक्षण में गतिविधि आधारित एवं व्यावहारिक तरीकों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स आगे प्रतिभागियों को विषयों को सरल और प्रभावी तरीके से समझा सकें।
ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण
एक सितंबर से 30 सितंबर तक ब्लॉक स्तर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के माध्यम से दोनों स्तरों के कार्मिकों के बीच बेहतर समन्वय विकसित किया जाएगा। इससे को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, उनके लिए आवश्यक शुरुआती सहयोग और समावेशी शिक्षण वातावरण तैयार करने की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकेगा।
समावेशी शिक्षा के लिए विकसित होगी क्षमता
प्रशिक्षण में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार तथा यूनिसेफ के सहयोग से तैयार सामग्री का उपयोग किया जाएगा। इसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शीघ्र पहचान एवं हस्तक्षेप, समावेशी आंगनबाड़ी केंद्र तथा दिव्यांगता समावेशन से जुड़े विषयों को शामिल किया जाएगा। इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों को बच्चों की विभिन्न सीखने संबंधी जरूरतों को समझने और उनके अनुरूप सहयोग देने में मदद मिलेगी।
गुणवत्ता और शत-प्रतिशत भागीदारी पर जोर
महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने प्रशिक्षण की गुणवत्ता, शत-प्रतिशत प्रतिभागिता और निर्धारित समय-सीमा में कार्यक्रम पूरा कराने के निर्देश दिए हैं। जनपद स्तर पर प्रशिक्षण की नियमित निगरानी की जाएगी तथा ब्लॉक स्तर के प्रशिक्षण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों की निर्धारित सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। प्रशिक्षण के बाद इसकी प्रगति एवं आख्या राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएगी।
बेसिक शिक्षा और आईसीडीएस के समन्वय से मजबूत होगा अभियान
समावेशी शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के बीच समन्वय पर विशेष जोर रहेगा। को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यरत कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों के संयुक्त प्रशिक्षण से बच्चों की जरूरतों की पहचान और उनके शैक्षिक सहयोग की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इसका लाभ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के साथ-साथ सभी बच्चों को अधिक समावेशी और अनुकूल शिक्षण वातावरण के रूप में मिलेगा।
योगी सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को उसकी जरूरत और क्षमता के अनुरूप सीखने का अवसर उपलब्ध कराना है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और शुरुआती सहयोग उनकी शिक्षा की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और प्री-प्राइमरी नोडल शिक्षकों का यह प्रशिक्षण समावेशी शिक्षा को जमीनी स्तर पर मजबूत करेगा और प्रत्येक बच्चे के लिए सुरक्षित, सहयोगी एवं अनुकूल सीखने का वातावरण तैयार करने में मदद करेगा।