यूपी में 24 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों पर अगले आदेश तक रोक, 158 केंद्रों की जांच में मिलीं गंभीर खामियां

सुरक्षित रक्त और ब्लड कंपोनेंट्स की उपलब्धता के लिए एफएसडीए का अभियान तेज, संक्रमण जांच से लेकर कोल्ड चेन तक की हो रही पड़ताल

यूपी में 24 चैरिटेबल ब्लड सेंटरों पर अगले आदेश तक रोक, 158 केंद्रों की जांच में मिलीं गंभीर खामियां

लखनऊ, 04 नवंबर । मरीजों को सुरक्षित रक्त और ब्लड कंपोनेंट्स उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने चैरिटेबल ब्लड सेंटरों के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष जांच अभियान के दौरान रक्त केंद्रों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। औचक निरीक्षण में तमाम खामियां मिलने पर 10 और चैरिटेबल ब्लड सेंटरों के संचालन पर तत्काल रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अब तक कार्रवाई की जद में आए केंद्रों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। अभियान के तहत 62 जनपदों के 158 ब्लड सेंटरों का निरीक्षण किया जा चुका है। जांच में कहीं बिना अनिवार्य संक्रमण जांच के रक्त जारी करने का मामला सामने आया तो कहीं दूषित फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी), खराब कोल्ड चेन और तकनीकी स्टाफ की गैरमौजूदगी के चलते यह एक्शन लिया गया।

रक्त की गुणवत्ता से लेकर कोल्ड चेन तक की पड़ताल

एफएसडीए की अंतरजनपदीय औषधि निरीक्षक टीमें ब्लड सेंटरों में रक्त संग्रह से लेकर मरीजों को रक्त एवं उसके घटकों की आपूर्ति तक पूरी व्यवस्था की पड़ताल कर रही हैं। जांच के दायरे में एचआईवी, एचसीवी और एचबीएसएजी (HBsAg) जैसे संक्रमणों की अनिवार्य जांच के लिए ELISA व्यवस्था, रक्त का सुरक्षित भंडारण, कोल्ड चेन, तापमान नियंत्रण, डोनर एवं इश्यू रजिस्टर, स्टॉक का मिलान, निर्धारित दरों पर रक्त एवं कंपोनेंट्स की उपलब्धता और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की तैनाती शामिल है।

मौसमी बीमारियों, विशेषकर डेंगू और मलेरिया के दौरान मरीजों को रक्त और प्लेटलेट्स की अतिरिक्त जरूरत पड़ती है। ऐसे में रक्त केंद्रों की कार्यप्रणाली में किसी भी तरह की लापरवाही मरीजों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसी को देखते हुए विभाग ने चैरिटेबल ट्रस्ट और सोसाइटी द्वारा संचालित रक्त केंद्रों की जांच तेज कर दी है।

10 केंद्रों में मिलीं चौंकाने वाली खामियां

ताजा कार्रवाई में अलग-अलग जिलों के 10 ब्लड सेंटरों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कई केंद्रों पर अनिवार्य जांच के बिना रक्त जारी किया जा रहा था, जबकि कुछ जगहों पर रक्त के घटकों की गुणवत्ता और सुरक्षित भंडारण के मानकों का पालन तक नहीं हो रहा था।

सुरजपुर चैरिटेबल ब्लड सेंटर, गौतमबुद्ध नगर: निरीक्षण के दौरान मेडिकल ऑफिसर समेत प्रमुख स्टाफ अनुपस्थित मिला। एफेरेसिस मशीन और ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध नहीं थे। डीप फ्रीजर में दूषित एफएफपी और एक्सपायर्ड दवाइयां मिलीं। तापमान, रक्तदान शिविर और स्टॉक से संबंधित रजिस्टर अधूरे थे। लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद केंद्र संचालित पाया गया। सभी गतिविधियों पर रोक लगाते हुए लाइसेंस निरस्त करने और संबंधित कर्मियों को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति की गई है।