प्रयागराज में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बड़ा खेल: महिला से 1.78 करोड़ की साइबर ठगी, एक आरोपी गिरफ्तार

जार्जटाउन की महिला को कूरियर कर्मचारी और साइबर पुलिस अधिकारी बनकर धमकाया; आरोपी के खाते में पहुंचे 48.50 लाख, 64.61 लाख की संपत्ति व रकम बरामद/फ्रीज।

प्रयागराज में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बड़ा खेल: महिला से 1.78 करोड़ की साइबर ठगी, एक आरोपी गिरफ्तार

प्रयागराज, 05 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के साइबर क्राइम थाना प्रयागराज की पुलिस टीम सोमवार को डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा करते हुए एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। गिरोह ने जार्जटाउन की एक महिला को ब्लूडार्ट कूरियर कंपनी का कर्मचारी और साइबर पुलिस अधिकारी बनकर व्हाट्सएप कॉल किया था। मादक पदार्थ का पार्सल आने और उसमें आधार कार्ड लगे होने का झूठा दावा कर महिला और उसके परिवार को जेल भेजने की धमकी देकर डिजिटल अरेस्ट किया गया। इसके बाद मुकदमे से नाम हटाने और कानूनी कार्रवाई से बचाने का झांसा देकर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.78 करोड़ रुपये स्थानांतरित करा लिए गए।

साेमवार काे यह जानकारी पुलिस उपायुक्त गंगानगर सोनम कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपित लखीमपुर खीरी जनपद के नीमगांव थाना क्षेत्र के सिकंदराबाद गांव निवासी आयुष अवस्थी पुत्र स्वर्गीय मनोज कुमार है।

उन्हाेंने बताया कि जार्जटाउन निवासी किरन कला पत्नी ब्रजभूषण ने इस मामले में एक अक्टूबर को साइबर क्राइम थाना प्रयागराज में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था और पुलिस उपायुक्त गंगानगर/नोडल साइबर क्राइम के निर्देशन में गठित टीम ने बैंक खातों की केवाईसी, धन के लेन-देन और आरोपितों द्वारा इस्तेमाल मोबाइल नंबरों के सीडीआर व सीएएफ का विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी में इस्तेमाल बैंक खाता आयुष अवस्थी, निवासी सिकंदराबाद, थाना नीमगांव, लखीमपुर खीरी का है। पुलिस टीम ने चार अक्टूबर की रात करीब नौ बजे उसके गांव स्थित घर से उसे गिरफ्तार कर लिया।



10 प्रतिशत कमीशन के लालच में खुलवाया खाता

पूछताछ में आयुष ने पुलिस को बताया कि उसकी स्किलोर वर्कफोर्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड नाम से मैनपावर एवं श्रमिक आपूर्ति फर्म है। इसी फर्म से संबंधित एचडीएफसी बैंक का चालू खाता साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल हुआ। नवंबर 2025 में गांव के निशांत त्रिवेदी के माध्यम से उसकी मुलाकात पीलीभीत के पूरनपुर निवासी राजन शुक्ला से हुई। राजन ने साइबर ठगी की रकम उसके खाते में स्थानांतरित कराने के बदले 10 प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया। पुलिस के मुताबिक, छह सितंबर को आयुष, निशांत और राजन विमान से मुंबई पहुंचे। वहां अन्य साथियों के साथ मिलकर सात और आठ सितंबर को पीड़िता के खाते से 48.50 लाख रुपये आयुष के खाते में स्थानांतरित कराए गए। बैंक खातों की जांच में यह भी सामने आया कि इसी तरीके से उत्तराखंड, तमिलनाडु और महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के लोगों से साइबर ठगी कर करीब 3.80 करोड़ रुपये अलग-अलग बैंक खातों में आगे की परतों में स्थानांतरित किए गए।



40 लाख की बीमा पॉलिसी और 24.53 लाख रुपये की बैंक राशि फ्रीज

पुलिस ने आरोपित के पास से 40 लाख रुपये की दो बीमा पॉलिसियां, 24.53 लाख रुपये की बैंक-रोक राशि, चालू खाते में 8,000 रुपये, दो मोबाइल फोन और एक चेकबुक बरामद की है। बरामद और फ्रीज की गई रकम एवं संपत्ति का कुल मूल्य 64,61,990 रुपये बताया गया है। आयुष के खिलाफ लखीमपुर खीरी में दहेज हत्या समेत दो पुराने मुकदमे भी दर्ज हैं। मामले में निशांत त्रिवेदी निवासी सिकंदराबाद, लखीमपुर खीरी और राजन शुक्ला निवासी दुधिया खुर्द बंजरिया, पूरनपुर, पीलीभीत वांछित हैं। दोनों की गिरफ्तारी के लिए तीन पुलिस टीमें गठित की गई हैं। अन्य आरोपितों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय टीम भी काम कर रही है।

इस कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना प्रभारी राघवेंद्र सिंह, निरीक्षक मो. आलमगीर, उपनिरीक्षक राहुल कुमार, उपनिरीक्षक दीपक कुमार भाटी, कांस्टेबल विवेक सिंह यादव, शिवम दिवाकर और रूप शामिल रहे। पुलिस आयुक्त ने टीम को सफल अनावरण के लिए 10 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।



पुलिस ने जारी की साइबर ठगी से बचने की सलाह

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर अपराध का शिकार होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत करें अथवा साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई अन्य जांच एजेंसी फोन अथवा वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। पुलिस ने लोगों से सतर्क और जागरूक रहने की अपील की है।