जौनपुर के आजाद हत्याकांड के आरोपित आयुष यादव की जमानत अर्जी खारिज
जौनपुर के आजाद हत्याकांड के आरोपित आयुष यादव की जमानत अर्जी खारिज
प्रयागराज, 30 जुलाई। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति समीर जैन ने जौनपुर के थाना खेता सराय में दर्ज हत्या के एक मामले में आरोपी आयुष यादव की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतक आजाद अपने पिता और अन्य लोगों के साथ चार पहिया वाहन से जा रहा था, तभी रास्ते में नामजद आरोपियों ने फायरिंग कर उसकी हत्या कर दी। एफआईआर में सह-आरोपी प्रदीप बिंद और रवि यादव को गोली चलाने वाला बताया गया था, लेकिन आयुष यादव का नाम एफआईआर में नहीं था।
विवेचना अधिकारी द्वारा दर्ज किए गए प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में मामले की तस्वीर बदल गई। गवाहों के अनुसार वारदात में असल में दो मोटरसाइकिलों पर सवार कुल छह हमलावर शामिल थे। बयानों के मुताबिक, आयुष यादव शूटर कुशल मिश्रा के साथ एक मोटरसाइकिल पर बैठा था, जिसे सह-आरोपी प्रदीप बिंद चला रहा था, जबकि दूसरी मोटरसाइकिल पर शूटर रवि यादव सह-आरोपी विकास यादव के साथ सवार था। इन्हीं बयानों के आधार पर आयुष यादव को बाद में मामले में आरोपी बनाया गया।
आयुष यादव की ओर से तर्क दिया गया कि आवेदक का नाम एफआईआर में नहीं था और उसे केवल जांच के दौरान आरोपी बनाया गया।मृतक को गोली मारने का सीधा आरोप आवेदक पर नहीं, बल्कि सह-आरोपी कुशल मिश्रा और रवि यादव पर है।
शिकायतकर्ता स्वयं भी घटना का प्रत्यक्षदर्शी था, बावजूद इसके उसने एफआईआर में आवेदक का नाम नहीं लिया, जिससे बाद में हुई गिरफ्तारी संदिग्ध बन जाती है। आवेदक का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह 7 मई 2026 से जेल में बंद है।
अपर शासकीय अधिवक्ता तथा शिकायतकर्ता के अधिवक्ताओं ने जमानत का विरोध किया। उनका कहना था कि भले ही आवेदक का नाम एफआईआर में न हो, लेकिन कई प्रत्यक्षदर्शियों ने विवेचना अधिकारी के सामने स्पष्ट रूप से बताया कि घटना में छह लोग दो मोटरसाइकिलों पर सवार थे और आवेदक शूटर कुशल मिश्रा के साथ ही मौजूद था। उन्होंने यह भी बताया कि इसी घटना से जुड़े सह-आरोपी विकास यादव, जो दूसरी मोटरसाइकिल पर शूटर रवि यादव के साथ सवार था, की जमानत अर्जी भी इसी हाईकोर्ट ने 21 जुलाई 2026 को खारिज कर दी है।
न्यायालय ने कहा कि भले ही आवेदक पर सीधे फायरिंग करने का आरोप न हो, लेकिन वह घटना के समय शूटर के साथ मोटरसाइकिल पर मौजूद था। कोर्ट ने कहा कि बी एन एस की धारा 3(5) (सामूहिक आपराधिक मंशा) के प्रावधानों को देखते हुए, प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि आवेदक निर्दोष है। सह-आरोपी विकास यादव की जमानत पहले ही खारिज होने के तथ्य को भी अदालत ने महत्वपूर्ण माना।
इन सब बिंदुओं पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा कि आवेदक जमानत पाने का हकदार नहीं है और मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना जमानत अर्जी खारिज कर दी।