बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव नाहर सिंह यादव को बड़ी राहत, आपराधिक कार्यवाही रद्द; कोर्ट बोला- सिविल विवाद को क्रिमिनल केस नहीं बना सकते

न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने चार्जशीट, संज्ञान/सम्मन आदेश और संबंधित मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप बार एसोसिएशन के सचिव के रूप में भूमिका से जुड़े हैं, निजी व्यक्ति के तौर पर नहीं।

बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव नाहर सिंह यादव को बड़ी राहत, आपराधिक कार्यवाही रद्द; कोर्ट बोला- सिविल विवाद को क्रिमिनल केस नहीं बना सकते

प्रयागराज, 14 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आगरा के नाहर सिंह यादव के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह विवाद मूल रूप से सिविल प्रकृति का है और इसे आपराधिक मामले में नहीं बदला जा सकता।

याचिका में 17 दिसंबर 2024 को दाखिल चार्जशीट, 16 मई 2026 के संज्ञान/सम्मन आदेश और थाना जगदीशपुरा, जिला आगरा में दर्ज केस की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। याची के वकीलों का कहना था कि यह विवाद जिला न्यायालय आगरा की बार एसोसिएशन की कमेटी से जुड़ा है, न कि किसी निजी लेन-देन से। इस संबंध में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के समक्ष पहले से ही शिकायत दर्ज है।

उच्च न्यायालय के पहले के एक फैसले श्याम सुंदर उपाध्याय एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि किसी शिक्षण संस्थान की प्रबंध समिति को लेकर दो गुटों के बीच का विवाद सिविल प्रकृति का है और इसे आपराधिक मुकदमे में तब्दील नहीं किया जाना चाहिए। यह भी बताया गया कि इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक पांडेय बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में विशेष अनुमति याचिका में बरकरार रखा है।

याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कहा कि नाहर सिंह यादव पर लगे आरोप जिला न्यायालय, फिरोजाबाद की बार एसोसिएशन के सचिव के तौर पर उनकी भूमिका से जुड़े हैं, न कि एक निजी व्यक्ति के रूप में। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामले में आपराधिक कार्यवाही नहीं चलाई जा सकती।इसके आधार पर न्यायालय ने चार्जशीट , संज्ञान आदेश और संबंधित मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करते हुए आवेदन स्वीकार कर लिया।