‘बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो जरूरी घटक’, मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली बोले- बेहतर समन्वय से मिलेगा त्वरित न्याय

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि आपसी संवाद और सहयोग न्याय वितरण प्रणाली की रीढ़ है। नए चैंबर और पार्किंग को अधिवक्ताओं के लिए बेहतर कार्य वातावरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

‘बार और बेंच न्याय व्यवस्था के दो जरूरी घटक’, मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली बोले- बेहतर समन्वय से मिलेगा त्वरित न्याय

प्रयागराज, 14 सितंबर। बार और बेंच एक-दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के दो आवश्यक घटक हैं। दोनों के बीच बेहतर तालमेल, संवाद और सहयोग न्याय वितरण प्रणाली की रीढ़ है। न्यायपालिका और कार्यपालिका की संवैधानिक स्वतंत्रता का अर्थ संस्थागत अलगाव नहीं है। व्यापक जनहित, त्वरित न्याय और बेहतर न्यायिक बुनियादी ढांचे के लिए संवैधानिक संस्थाओं के बीच समन्वय आवश्यक है। यह बातें इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने सोमवार को हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के कार्यक्रम में कहीं।

मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि बार के प्रख्यात अधिवक्ताओं ने वकालत के साथ सार्वजनिक जीवन और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सामाजिक सुधारों तथा वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई। अधिवक्ताओं के सामूहिक ज्ञान और योगदान ने संविधान को मजबूती प्रदान की है। आज भी संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अधिवक्ताओं की प्रतिबद्धता संविधान को जीवंत और गतिशील बनाए हुए है।

हर समस्या का तत्काल समाधान संभव नहीं, पर समाधान का प्रयास जारी

मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि हर समस्या का तुरंत समाधान संभव नहीं होता, लेकिन न्यायपालिका अधिवक्ताओं की चिंताओं को समझती है और उनके व्यावहारिक समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहती है। अधिवक्ताओं के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। हाल में बनाए गए नए चैंबर और पार्किंग व्यवस्था इसी प्रयास का हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि यह केवल ईंट-पत्थर से भवन तैयार करने का काम नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण विकसित करना है, जिसमें अधिवक्ता सम्मान, गरिमा और दक्षता के साथ अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

एकीकृत न्यायालय परिसर सहयोग का उदाहरण

मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली ने कहा कि न्यायपालिका और कार्यपालिका की अपनी-अपनी विशिष्ट संवैधानिक जिम्मेदारियां हैं। संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखते हुए जनहित के लिए आपसी सहयोग और समन्वय जरूरी है। प्रदेश में बनाए जा रहे एकीकृत न्यायालय परिसर इसका सकारात्मक उदाहरण हैं। इनसे न्यायिक कार्यों के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी और न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।

युवा अधिवक्ता संस्था की धरोहर

मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि बार के युवा अधिवक्ता इस महान संस्था की भावी धरोहर और संरक्षक हैं। यह सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है कि युवा अधिवक्ताओं को बेहतर कार्य के अवसरों के साथ ऐसा वातावरण भी मिले, जहां उनकी पेशेवर दक्षता के साथ नैतिक मूल्य भी विकसित हों। उन्होंने कहा कि मजबूत बार और सशक्त बेंच मिलकर न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत कर सकते हैं।