विवाहिता की मौत मामले में सास की जमानत अर्जी पर सुनवाई टली

विवाहिता की मौत मामले में सास की जमानत अर्जी पर सुनवाई टली

विवाहिता की मौत मामले में सास की जमानत अर्जी पर सुनवाई टली

प्रयागराज, 28 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मंगलवार को एक बहू की मौत के मामले में सास गुड्डी देवी उर्फ गुड़िया की जमानत अर्जी की अगली सुनवाई की तिथि 05 अगस्त नियत की है। न्यायालय ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष पर संदेह के कारण फोरेंसिक मेडिसिन एवं टाक्सिकोलाजी विभागाध्यक्ष मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज प्रयागराज को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मदद के लिए कहा है। अधिवक्ता ने दलील दी कि गुड्डी देवी मृतका के पति की जैविक माँ जरूर हैं, लेकिन बचपन में ही उनके देवर ने मृतका के पति को गोद ले लिया था, और तभी से वह अपने गोद लेने वाले पिता के साथ अलग रहता आया है, जबकि आवेदिका खुद अपने परिवार के साथ अलग रहती हैं।

हालांकि याची अधिवक्ता अलग रहने से जुड़ा कोई ठोस दस्तावेज या रिपोर्ट पेश नहीं कर सके, और यह पता लगाने के लिए समय माँगा कि क्या आवेदिका का मृतका के पति के अलावा कोई और बेटा भी है। सबसे अहम बात यह रही कि अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक मृतका के शरीर के संवेदनशील अंगों पर छह चोटें थीं, जिनमें खोपड़ी में फ्रैक्चर और दिमाग में रक्त का जमाव भी शामिल था। बावजूद इसके, पोस्टमार्टम करने वालीं डॉ. नीलू ने मौत का कारण "शॉक या हेमरेज" (सदमा या रक्तस्राव) बताया।

अदालत ने कहा कि शॉक या हेमरेज खुद मौत का कारण नहीं हो सकता ।यह असल में चोटों का परिणाम होता है, इसलिए वास्तविक कारण वही चोटें ही होनी चाहिए थीं। इस विसंगति को स्पष्ट करने के लिए अदालत ने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होकर अदालत की सहायता करने का निर्देश दिया है। रजिस्ट्रार (कंप्लायंस) को आदेश की प्रति संबंधित विभागाध्यक्ष को भेजने और कार्यालय को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई की तिथि 5 अगस्त 2026 नियत की गई है।