गणेश उत्सव में गूंजी संस्कृत की आवाज, DIG वैभव कृष्ण बोले- ‘ज्ञान और संस्कारों का मूल आधार है संस्कृत’
गणेश उत्सव में गूंजी संस्कृत की आवाज, DIG वैभव कृष्ण बोले- ‘ज्ञान और संस्कारों का मूल आधार है संस्कृत’
वाराणसी, 15 सितंबर । उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में लगातार दूसरे दिन मंगलवार को भी पूजा पंडालों में भगवान गणेश की पूजा अर्चना की गई। कहीं दस दिनों तक तो कहीं सप्ताह भर पूजा पंडालों में भगवान गणेश की आराधना के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
अगस्तकुंडा स्थित शारदा भवन में आयोजित गणेशोत्सव का दूसरा दिन संस्कृत को समर्पित रहा। यहां आयोजित उत्सव में वाराणसी शहर दक्षिणी के विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी व वाराणसी परिक्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) वैभव कृष्ण भी शामिल हुए। उत्सव में शास्त्रार्थ प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों का उत्साह वर्धन करते हुए डीआईजी ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि आज के बच्चों को संस्कृत बोलते और श्लोक कहते देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई है। भाषा का मुख्य उद्देश्य संवाद है। जब हम आपस में संस्कृत में बात करेंगे, तो यह भाषा जीवित रहेगी और आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं है, अपितु यह हमारी संस्कृति, ज्ञान और संस्कारों का मूल आधार है। यह देववाणी है, जिसमें शरीर, मन और बुद्धि को स्वस्थ रखने की अद्भुत शक्ति है। हमारे प्राचीन ग्रंथ, वेद और उपनिषद इसी भाषा में रचित हैं। इस प्रतियोगिता में कुल 104 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के प्रारम्भ में शलाका व व्याख्यान प्रतियोगिता आयोजित हुई । जिसमें व्याकरण में अष्टाध्यायी, ज्योतिष में षट पंचाशिका, साहित्य में अमरकोष व दर्शन विषय में श्रीमदभगवदगीता से प्रश्न पूछे गए थे। व्याख्यान में साहित्य विषय में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र को पंडित गौरीनाथ पाठक व इंदिराबाई पाठक रजत पदक से पुरस्कृत किया गया। वहीं, व्याकरणशास्त्र में प्रथम स्थान प्राप्त प्रतिभागी को शिवकुमार शिवाचार्य महास्वामी रजत पदक प्रदान किया गया।
उत्सव के तीसरे सत्र में विद्वत गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में शामिल विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने कहा कि आज का यह पावन अवसर हमारे समाज के मनीषियों और ज्ञान के दीप जलाने वाले विद्वानों के अभिनंदन का है। एक प्रसिद्ध आचार्य याज्ञिक प्रवचन में कहा गया है कि "राजा का सम्मान केवल अपने देश में होता है, किंतु एक विद्वान को पूरे विश्व में आदर मिलता है। संचालन डा.विनोद राव पाठक व धन्यवाद ज्ञापन यादव राव पाठक ने दिया। अन्य उपस्थित विद्वानों में पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल, प्रो.नागेंद्र पाण्डेय, डा.गणेश दत्त शास्त्री, प्रो.रमाकांत पाण्डेय, डा. दिव्यचेतन ब्रह्मचारी, ज्योतिषाचार्य अमोद दत्त शास्त्री, डा.पवन शुक्ला, डा.उमाशंकर त्रिपाठी, अभिषेक उपाध्याय, आचार्य संजय उपाध्याय आदि रहे। स्वागत कपिल पाठक व संयोजन वरद व स्वप्निल पाठक ने किया। इसी तरह उत्सव के दूसरे दिन रामघाट स्थित सांगवेद विद्यालय में ऋृग्वेद की परीक्षा हुई। इस परीक्षा में उमंगपंत पुणवांबेकर उत्तम तथा रोहित कुमार मिश्र उत्साहनीय रहे। इसी तरह न्याय शास्त्र की परीक्षा में अभिषेक त्रिपाठी एवं राजराजेश्वर द्राविड़ उत्र्तीण हुए। यहां आयोजित गणेशोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को शुक्ल यर्जुर्वेद की माध्यन्दिन संहिता में प्रतियोगिता होगी। यह जानकारी विद्यालय के गणेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने दी।