देवरिया जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग हेतु अधिग्रहण मामले में मुआवजा निर्धारण से जुड़े अवार्ड रद्द

देवरिया जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग हेतु अधिग्रहण मामले में मुआवजा निर्धारण से जुड़े अवार्ड रद्द

देवरिया जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग हेतु अधिग्रहण मामले में मुआवजा निर्धारण से जुड़े अवार्ड रद्द

प्रयागराज, 28 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को देवरिया जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-727बी (सलेमपुर बाईपास) के निर्माण हेतु किए गए भूमि अधिग्रहण मामले में मुआवजा निर्धारण से जुड़े अवार्डों को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने मनोज कुमार बरनवाल एवं अन्य की याचिका सहित कुल नौ याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

याची देवरिया के ग्राम कौड़िया जयराम के भूमिधर/सह-खातेदार थे, जिनकी भूमि सलेमपुर बाईपास चार लेन निर्माण के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3ए के तहत अधिसूचित की गई थी। धारा 3डी के अंतर्गत घोषणा 8 दिसंबर 2023 को राजपत्र में प्रकाशित हुई और मुख्य राजस्व अधिकारी, देवरिया ने 15 फरवरी 2024 को धारा 3जी के तहत मुआवजा अवार्ड पारित किया।

याचियों का मुख्य तर्क यह था कि धारा 3जी(3) के तहत अनिवार्य सार्वजनिक सूचना ,जिसमें दो स्थानीय समाचार पत्रों में दावे आमंत्रित करने की सूचना प्रकाशित की जानी चाहिए थी,कभी प्रकाशित ही नहीं की गई। इसके कारण उन्हें मुआवजा निर्धारण से पहले अपना दावा प्रस्तुत करने का अवसर ही नहीं मिला। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि 28 दिसंबर 2023 को "आज" (हिंदी) और "टाइम्स ऑफ इंडिया" (अंग्रेजी) में सूचना प्रकाशित की गई थी, लेकिन पूरक शपथपत्र में यह स्वीकार किया गया कि उसमें केवल धारा 3डी का उल्लेख था धारा 3जी(3) का जिक्र लिपिकीय भूल के कारण छूट गया था। प्राधिकरण ने इसे मामूली तकनीकी चूक बताते हुए कहा कि लगभग 83 फीसदी भूस्वामी पहले ही मुआवजा ले चुके हैं और सड़क निर्माण कार्य काफी आगे बढ़ चुका है, इसलिए हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धारा 3डी (भूमि का अधिग्रहण/निहित होना) और धारा 3जी(3) (मुआवजा निर्धारण से पहले दावा आमंत्रित करने की सूचना) दोनों अलग-अलग प्रयोजनों के लिए हैं और एक को दूसरे का विकल्प नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा कि यदि प्रकाशन में कोई त्रुटि हुई थी, तो प्रतिवादियों को शुद्धिपत्र जारी करना चाहिए था, जो नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि जब कानून किसी कार्य को करने की एक निश्चित प्रक्रिया निर्धारित करता है, तो उसे उसी तरीके से पूरा किया जाना चाहिए, किसी अन्य तरीके से नहीं। कोर्ट ने *वीणा सिंह* मामले में प्रतिवादियों की निर्भरता को भी अप्रासंगिक बताया, क्योंकि उस मामले में धारा 3जी(3) की सूचना वास्तव में जारी हुई थी। निर्देश कोर्ट ने मुआवजा अवार्ड 15 फरवरी 2024 सहित अन्य तिथियों के अवार्ड रद्द कर दिया ।मामला सक्षम प्राधिकारी उपजिलाधिकारी सलेमपुर बाईपास, देवरिया को वापस भेज दिया। कोर्ट ने कहा प्राधिकारी को धारा 3जी(3) के अनुपालन में नई सार्वजनिक सूचना दो स्थानीय समाचार पत्रों (एक हिंदी सहित) में प्रकाशित करनी होगी, जिसमें भूमि का पूर्ण विवरण हो। प्रभावित भूस्वामियों को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपने दावे प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने मुआवजे की मात्रा के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है । यह विषय सक्षम प्राधिकारी पर छोड़ दिया गया है। याचिकाकर्ता अख्तर हुसैन, जो पहले ही मुआवजा स्वीकार कर चुके थे, ने अवार्ड रद्द करने का आग्रह वापस ले लिया, लेकिन मुआवजे की राशि बढ़ाने हेतु वैधानिक उपाय अपनाने की छूट बरकरार रखी गई। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना का आगे बढ़ना या अधिकांश भूस्वामियों द्वारा मुआवजा स्वीकार कर लेना, वैधानिक प्रक्रिया के उल्लंघन को वैध नहीं बना सकता। साथ ही, यह निर्णय अन्य लंबित या भविष्य के भूमि अधिग्रहण मामलों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है जहां धारा 3जी(3) की अनिवार्य सूचना प्रकाशित करने में चूक हुई हो।