इलाहाबाद हाईकोर्ट की शादी रजिस्ट्रेशन पर गाइडलाइन, आधार कार्ड से साबित नहीं होगी उम्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट की शादी रजिस्ट्रेशन पर गाइडलाइन, आधार कार्ड से साबित नहीं होगी उम्र

इलाहाबाद हाईकोर्ट की शादी रजिस्ट्रेशन पर गाइडलाइन, आधार कार्ड से साबित नहीं होगी उम्र

प्रयागराज, 26 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में गंभीर कमियां मिलने पर राज्य सरकार और पंजीकरण विभाग को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि आधार कार्ड केवल किसी व्यक्ति की पहचान साबित करता है, लेकिन उसे जन्मतिथि या उम्र का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसी तरह केवल ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के आधार पर भी शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस पूरे मुद्दे को बाल विवाह रोकने की आवश्यकता से जोड़ते हुए व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई ।

यह आदेश न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी ने दीपक पाल की अपील पर सुनवाई करते हुए पारित किया। मामले की पड़ताल के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि संबंधित विवाह का पंजीकरण आधार कार्ड और ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर किया गया था। अदालत ने पाया कि उम्र के सत्यापन को लेकर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।

उच्च न्यायालय ने कहा कि आधार कार्ड को जन्मतिथि का वैध प्रमाण नहीं माना जा सकता। वहीं ट्रांसफर सर्टिफिकेट भी किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में बताए गए दस्तावेजों की श्रेणी में शामिल नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि जिस ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर विवाह पंजीकरण किया गया, उसका निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन भी नहीं कराया गया था। ऐसी स्थिति में पंजीकरण अधिकारी के पास आयु संबंधी कोई प्रमाणित दस्तावेज उपलब्ध नहीं था और उसने अपनी कानूनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई।

अदालत ने कहा कि जब तक उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली-2017 में आवश्यक संशोधन नहीं किए जाते, तब तक कुछ विशेष दिशानिर्देशों का पालन किया जाए। कोर्ट ने सबसे पहले यह सुनिश्चित करने को कहा कि लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की 18 वर्ष से कम होने पर किसी भी विवाह का पंजीकरण न किया जाए।

संदेह होने पर होगी तत्काल कार्रवाई

अदालत ने निर्देश दिया कि यदि उपलब्ध दस्तावेजों या अन्य सामग्री से किसी पक्ष की उम्र कम होने का तार्किक संदेह पैदा होता है तो विवाह का पंजीकरण सामान्य प्रक्रिया में न किया जाए। ऐसे मामलों की सूचना तुरंत विवाह प्रोबेशन अधिकारी और जिलाधिकारी को भेजी जाए ताकि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई हो सके।

ऑनलाइन सिस्टम और दस्तावेज सत्यापन पर जोर

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि ऑनलाइन व्यवस्था ऐसी बनाई जाए जिसमें केवल आधार ऑथेंटिकेशन के आधार पर विवाह प्रमाणपत्र जारी न हो सके। दोनों पक्षों की जन्मतिथि का सत्यापन अनिवार्य रूप से रिकॉर्ड किया जाए और उसके स्रोत का भी उल्लेख हो। यदि सत्यापन अधूरा हो या किसी प्रकार की त्रुटि सामने आए तो आवेदन स्वतः आगे न बढ़ सके।

जन्म प्रमाणपत्र और हाईस्कूल रिकॉर्ड को प्राथमिकता

अदालत ने राज्य सरकार से उम्र संबंधी प्रमाणों के बारे में स्पष्ट मानक तय कर व्यापक स्तर पर प्रसारित करने को कहा है। कोर्ट ने धारा 94 के अनुरूप जन्म प्रमाणपत्र और हाईस्कूल के शैक्षणिक रिकॉर्ड को प्रमुख दस्तावेजों के रूप में रेखांकित किया।

विभागों, जिला जजों और डीएलएसए को भी जिम्मेदारी

प्रिंसिपल सेक्रेटरी, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन को पोर्टल पर सत्यापन का पूरा विवरण दर्ज करने, अनियमितताओं को फ्लैग करने और अधूरे सत्यापन वाले मामलों में प्रमाणपत्र जारी होने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की प्रति सभी जिला जजों तक पहुंचानी होगी। जिला जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में जिलाधिकारी, पंजीकरण अधिकारियों, स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन अधिकारियों तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। साथ ही इस विषय को जिला मॉनिटरिंग सेल की बैठकों में भी रखा जाएगा।

कोर्ट ने आईजी रजिस्ट्रेशन, उत्तर प्रदेश को विवाह पंजीकरण अधिकारियों के लिए राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए लखनऊ स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के निदेशक से समन्वय कर विशेषज्ञ उपलब्ध कराए जाएंगे। रजिस्ट्रेशन विभाग को समय-समय पर निरीक्षण कर रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा गया है। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रत्येक दो महीने में पंजीकरण कार्यालयों का निरीक्षण करेंगे, हाल में दर्ज विवाहों के नमूने और आयु सत्यापन रिकॉर्ड की जांच करेंगे तथा रिपोर्ट जिला जज को भेजेंगे। मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर 2026 को होगी और तब तक अदालत ने अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।