आई आई टी कानपुर के प्रो. वेंकटेश के. सुब्रमण्यन के विरुद्ध यौन उत्पीडन की जांच पर रोक बरकरार
आई आई टी कानपुर के प्रो. वेंकटेश के. सुब्रमण्यन के विरुद्ध यौन उत्पीडन की जांच पर रोक बरकरार
प्रयागराज, 21 अगस्त । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने शुक्रवार को आई आई टी कानपुर व अन्य द्वारा दायर स्पेशल अपील पर विपक्षियों से जवाब मांगा है और एकलपीठ द्वारा जांच की अनुमति देने के आदेश पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने आई आई टी कानपुर की विशेष अपील की सुनवाई करते हुए दिया है।
यह अपील प्रो. वेंकटेश के. सुब्रमण्यन के खिलाफ उस जांच से जुड़ी है, जिसमें एक इंटर्न को कथित तौर पर "सेक्स टॉय" बताई गई वस्तु उपलब्ध कराने का आरोप साबित माना गया था। दरअसल यह वस्तु "आर्म-बैंड वाइब्रेशन कम्युनिकेशन गैजेट" नामक शोध परियोजना का हिस्सा थी, जो सशस्त्र बलों व साइलेंट ऑपरेशंस के लिए गैर-मौखिक संचार पर आधारित थी।
संस्थान की तरफ से कहा गया कि जांच में सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था। इससे पहले एक समान मामले प्रो. आनंद सुब्रमण्यम में एकलपीठ के उस आदेश को खंडपीठ पलट चुकी है, जिसमें नियमों को अल्ट्रा वायरस घोषित किया गया था। यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है, जहां कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई है।
प्रोफेसर की तरफ से कहा गया कि यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 की धारा 2(एन) के तहत आवश्यक तत्व, शारीरिक संपर्क, यौन अनुग्रह की मांग, यौन टिप्पणी या अश्लील सामग्री मौजूद नहीं हैं। व्हाट्सएप चैट में भी कोई आपत्तिजनक संकेत नहीं मिला। यह भी तर्क दिया गया कि गैजेट को "सेक्स टॉय" नहीं कहा जाना चाहिए था, हालांकि किसी वस्तु के वैकल्पिक उपयोग की संभावना से उत्पीड़न का निर्णय प्रभावित नहीं होना चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि मामले पर गहन विचार आवश्यक है। दोनों पक्षों को अतिरिक्त हलफनामे दाखिल करने की अनुमति दी गई और मामले को आगे सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया। अगले आदेश तक, 5 जनवरी 2026 के उस निर्णय पर रोक जारी रहेगी, जिसके तहत आगे की जांच की अनुमति दी गई थी।