डमी स्कूल में बिना जानकारी दाखिले का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के दिए आदेश

जौनपुर के स्कूल की सूची में छात्र का नाम दर्ज मिलने पर कोर्ट ने जताई चिंता, आजमगढ़ के कोचिंग संस्थान और स्कूल प्रबंधन के संबंधों की जांच के निर्देश; अगली सुनवाई 2 नवंबर को

डमी स्कूल में बिना जानकारी दाखिले का आरोप, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच के दिए आदेश


प्रयागराज, 09 अक्टूबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जौनपुर के एक कथित "डमी स्कूल" के नाम पर छात्रों के फर्जी दाखिले के मामले को शिक्षा व्यवस्था में धोखाधड़ी बताते हुए राज्य सरकार को जांच के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने अबू हुजैफा की याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वह कभी "शाहाना इंटरनेशनल स्कूल, फरीदाबाद शाहगंज रोड, जौनपुर" का छात्र नहीं रहा। न उसने वहां आवेदन किया, न कभी कक्षा में गया और न ही कोई फीस दी। इसके बावजूद प्रतिवादी संख्या 5 व 6 के जवाबी हलफनामे के साथ लगी सीबीएसई की कक्षा 11 (2025-26) की पंजीकृत छात्रों की सूची में उसका नाम दर्ज बताया गया। याचिकाकर्ता के अनुसार वह आजमगढ़ के फड़गुड़िया स्थित हॉस्टल में रहता था और 5 जुलाई 2025 से मार्च 2026 तक प्रतिवादी संख्या 5 के यहां परीक्षाएं देता रहा, जबकि शाहाना स्कूल में दाखिले की तारीख 12 अगस्त 2025 दिखाई गई है।

रिकॉर्ड देखकर कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी संख्या 5 व 6 प्रथम दृष्टया ऐसा "रैकेट" चलाते प्रतीत होते हैं, जिसमें छात्रों को उनकी जानकारी के बिना डमी स्कूल में दाखिला दिया जाता है और साथ ही नीट की आवासीय कोचिंग भी चलाई जाती है। कोर्ट ने इसे शिक्षा व्यवस्था में स्पष्ट धोखाधड़ी बताया।

हाईकोर्ट ने हीरा पब्लिक स्कूल (ग्राम फड़गुड़िया, पोस्ट अम्बारी, आजमगढ़) और उसी संस्था के तहत चल रही आईआईटी-जेईई, नीट व क्लैट कोचिंग की जांच करनी होगी।जांच में प्रबंधन और शाहाना इंटरनेशनल स्कूल से उसके संबंधों की रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट प्रतिवादी संख्या 2 के व्यक्तिगत हलफनामे के साथ 2 नवंबर 2026 तक दाखिल करनी होगी, अन्यथा उन्हें स्वयं कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।

याचिकाकर्ता को पिछले स्कूल का ट्रांसफर सर्टिफिकेट और बोर्ड में पंजीकरण बदले जाने का हलफनामा देना होगा।

शाहाना इंटरनेशनल स्कूल को प्रतिवादी संख्या 7 और सीबीएसई को प्रतिवादी संख्या 8 बनाया गया है, और नोटिस जारी हुआ है।

अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को होगी, जिसमें संस्था के प्रधानाचार्य और प्रबंधक को उपस्थित रहना होगा।