सफल उद्घोषक या लेखक बनने के लिए भाषा की शुद्धता और विषय की गहरी समझ जरूरी : पांडुरंग पुराणिक

सफल उद्घोषक या लेखक बनने के लिए भाषा की शुद्धता और विषय की गहरी समझ जरूरी : पांडुरंग पुराणिक

सफल उद्घोषक या लेखक बनने के लिए भाषा की शुद्धता और विषय की गहरी समझ जरूरी : पांडुरंग पुराणिक

वाराणसी, 08 जून । उत्तर प्रदेश में वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय में सोमवार से साहित्यिक विरासत एवं मीडिया कौशल विषयक इंटर्नशिप कार्यक्रम की शुरूआत हुई। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के तत्वावधान में आयोजित पंद्रह दिवसीय विशेष इंटर्नशिप कार्यक्रम में 32 विद्यार्थी प्रतिभागी के रूप में शामिल हुए।

साहित्यिक विरासत, व्याख्यान लिप्यंतरण, साहित्यिक लेखन और कार्यालय तथा पुरालेख प्रबंधन विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं में नई विधाओं को सीखने को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र के निदेशक, प्रो. आनंद वर्धन शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में अकादमिक कौशल के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान अनिवार्य है। यह इंटर्नशिप छात्रों को साहित्यिक धरोहरों के संरक्षण और आधुनिक मीडिया प्रबंधन के बीच सेतु का कार्य करेगी। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उद्घोषक पांडुरंग पुराणिक ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने मीडिया की बदलती भूमिका, उद्घोषणा (एंकरिंग) की बारीकियों, साक्षात्कार के संरक्षण और आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के कार्य-कलापों पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक सफल उद्घोषक या लेखक बनने के लिए भाषा की शुद्धता और विषय की गहरी समझ का होना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक आचार्य, डॉ. हरीश कुमार ने बताया कि 8 जून से 22 जून 2026 तक चलने वाले इस इंटर्नशिप कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पुरालेख प्रबंधन और साहित्यिक लेखन के प्रायोगिक गुर सिखाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों को भविष्य में शोध और प्रशासनिक क्षेत्र में बेहतर अवसर प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।