दशमोत्तर छात्रवृत्ति 2026-27: 15 सितंबर से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन, समाज कल्याण विभाग ने जारी किया कार्यक्रम
नवीनीकरण (Renewal) के आवेदन 15 सितंबर से 15 अक्टूबर और नए (Fresh) आवेदन 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक किए जा सकेंगे
प्रयागराज, 24 जुलाई । शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। प्रयागराज के जिला समाज कल्याण अधिकारी रामशंकर पटेल ने शुक्रवार को सभी शिक्षण संस्थानों और छात्र-छात्राओं से समय-सीमा के भीतर आवेदन और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है, ताकि कोई भी पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित न रहे।
समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2026-27 में दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए आवेदन प्रक्रिया निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार संचालित की जाएगी।
योजना के तहत शिक्षण संस्थानों को 15 अगस्त 2026 तक मास्टर डाटा तैयार करना होगा, जबकि विश्वविद्यालय एवं संबद्ध एजेंसियां 30 अगस्त तक उसका ऑनलाइन सत्यापन करेंगी। नवीनीकरण करने वाले छात्र 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वहीं नए (Fresh) छात्र 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों द्वारा आवेदन पत्रों का सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद पात्र छात्रों के खातों में निर्धारित तिथियों पर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी जाएगी।
जिला समाज कल्याण अधिकारी ने सभी शिक्षण संस्थानों से कहा है कि वे छात्रों का शत-प्रतिशत डाटा समय पर ऑनलाइन सत्यापित कर अग्रसारित करें तथा अपात्र छात्रों का डाटा नियमानुसार निरस्त करें। किसी भी स्तर पर आवेदन लंबित न रखा जाए।
समय से सत्यापन न हुआ तो संस्थान एवं छात्र जिम्मेदार
जिला समाज कल्याण अधिकारी रामशंकर पटेल ने कहा कि सभी शिक्षण संस्थान और छात्र-छात्राएं शासन द्वारा निर्धारित समय-सारिणी का पालन करें। पात्र छात्रों के आवेदन समय पर सत्यापित और अग्रसारित किए जाएं, ताकि किसी भी छात्र को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित न होना पड़े। यदि किसी संस्थान या छात्र की लापरवाही से आवेदन लंबित रहता है और पात्र छात्र छात्रवृत्ति से वंचित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षण संस्थान अथवा छात्र की होगी।