जन्माष्टमी रोकने और मूर्ति-प्रसाद फेंकने के अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रशासन का पलटवार, SDM बोलीं- ‘आरोप निराधार’

पलाहीपुर मामले में SDM सदर गरिमा सोनकिया ने दी सफाई; प्रशासन के मुताबिक बिना अनुमति ग्राम समाज की जमीन पर चबूतरा बनाया गया था, आयोजकों ने स्वयं मूर्ति हटाई और चबूतरा तोड़ा।

जन्माष्टमी रोकने और मूर्ति-प्रसाद फेंकने के अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रशासन का पलटवार, SDM बोलीं- ‘आरोप निराधार’

सुलतानपुर, 08 सितंबर। उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर के विकासखंड दुबेपुर के ग्राम पलाहीपुर, तहसील सदर में जन्माष्टमी आयोजन को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में प्रसारित खबरों पर जिला प्रशासन ने स्पष्टीकरण दिया है। जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह के निर्देश पर एसडीएम सदर गरिमा सोनकिया ने पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा जन्माष्टमी का त्योहार मनाने से नहीं रोका गया और न ही प्रशासनिक टीम द्वारा मूर्ति अथवा प्रसाद फेंका गया।

एसडीएम सदर गरिमा सोनकिया के अनुसार, 3 सितंबर 2026 की रात्रि ग्राम सभा पलाहीपुर की ग्राम प्रधान के पति गोरेलाल यादव पुत्र रामखिलावन यादव द्वारा ग्राम समाज की बंजर भूमि गाटा संख्या 1679 में बिना अनुमति चबूतरे का निर्माण कर उस पर टेंट आदि लगाकर धार्मिक आयोजन की योजना बनाई गई थी। मामले की जानकारी मिलने पर राजस्व एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह मौके पर पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया।

एसडीएम सदर गरिमा सोनाकिया ने मंगलवार को बताया कि टीम ने प्रधान के पति और उनके समर्थकों को भूमि एवं निर्माण से संबंधित विधिक स्थिति की जानकारी दी। इसके बाद आयोजकों द्वारा स्वयं छोटी मूर्ति को सम्मानपूर्वक हटा लिया गया तथा चबूतरे को भी स्वयं तोड़ दिया गया। राजस्व एवं पुलिस टीम के मौके से जाने के बाद गोरेलाल यादव, रामीश यादव और अन्य समर्थकों द्वारा कथित तौर पर प्रसाद सड़क पर फेंका गया और नारेबाजी की गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाए जाने की बात भी प्रशासन की ओर से कही गई है। प्रशासन के अनुसार, शांति व्यवस्था भंग करने के प्रयास के संबंध में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा संख्या 0467/2026 पंजीकृत किया गया है।

मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए आरोपों पर भी प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। एसडीएम सदर गरिमा सोनाकिया ने प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी और मौके की कार्रवाई का हवाला देते हुए जन्माष्टमी रोकने, मूर्ति हटाने अथवा प्रसाद फेंकने से संबंधित आरोपों को निराधार एवं भ्रामक बताया। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बिना सत्यापन सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक या विवादित जानकारी प्रसारित न करें, ताकि क्षेत्र की शांति एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।