10% से कम ऑनलाइन उपस्थिति वाले स्कूलों पर परिषद सख्त, प्रधानाचार्यों को नोटिस; 35 जिलों पर निगरानी बढ़ी
राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों, शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य है। कम अनुपालन वाले विद्यालयों पर कार्रवाई और नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
प्रयागराज, 07 सितंबर । उत्तर प्रदेश के राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों तथा शिक्षणेतर कर्मचारियों की शत-प्रतिशत दैनिक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने को लेकर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सख्ती बढ़ा दी है। परिषद की ओर से जारी विज्ञप्ति में संबंधित विद्यालयों को ऑनलाइन उपस्थिति एवं निरीक्षण व्यवस्था में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि कई जनपदों के विद्यालयों में ऑनलाइन उपस्थिति निर्धारित मानक से काफी कम पाई गई है। जिनमें भदोही, उन्नाव, मिर्जापुर, फतेहपुर, सहारनपुर, गोंडा, प्रयागराज, चित्रकूट, चंदौली, कानपुर नगर, मैनपुरी, सिद्धार्थनगर, आगरा, बलिया, सोनभद्र, हमीरपुर, आजमगढ़, कौशाम्बी, कानपुर देहात, जौनपुर, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद, बिजनौर, बदायूं, अलीगढ़, फिरोजाबाद, बहराइच, देवरिया और गोरखपुर समेत कई जनपदों का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा कि इन जनपदों में 10 प्रतिशत अथवा उससे कम विद्यालयों द्वारा ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराए जाने की स्थिति परिषद के निर्देशों के अनुपालन एवं नियमित निरीक्षण की दृष्टि से गंभीर है। इसे लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव भगवती सिंह का कहना है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि विद्यालयों में छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करना परिषद की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित विद्यालयों को परिषद के निर्देशों का पालन करते हुए प्रतिदिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने और व्यवस्था की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित विद्यालयों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों तथा शिक्षणेतर कर्मचारियों की शत-प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद जिन विद्यालयों में उपस्थिति का अनुपालन बेहद कम है, वहां स्थिति को गंभीरता से लिया जा रहा है।