पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विकास का रोडमैप बनेगा, कुलपति प्रो. आरके सिंह ने शिक्षकों से मांगे सुझाव
कुलपति बोले- टीम भावना, समर्पण और नई पहल से मिलेगी विश्वविद्यालय को नई पहचान; छात्रों के लिए ट्रेनिंग, इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर
जौनपुर, 07 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के कुलपति सभागार में बुधवार को कुलपति प्रो. आर.के. सिंह की अध्यक्षता में शिक्षकों एवं संविदा शिक्षकों की बैठक हुई। इसमें विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं समग्र विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।
कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान वहां के विद्यार्थियों की उपलब्धियों और शिक्षकों के सामूहिक प्रयासों से होती है। विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए शिक्षकों में टीम भावना, आपसी सहयोग और संस्थान के प्रति समर्पण जरूरी है। प्रत्येक शिक्षक को विश्वविद्यालय की उन्नति में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि संस्थान को आगे बढ़ाने के लिए समय की बाध्यता से परे जाकर कार्य करने, नई पहल करने और जिम्मेदारियों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने की आवश्यकता है। त्याग, समर्पण और निरंतर प्रयास से ही किसी संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
कुलपति ने विश्वविद्यालय के उपलब्ध संसाधनों का विद्यार्थियों के हित में अधिकतम उपयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा और विश्वविद्यालय के संसाधनों को उद्योग जगत से जोड़कर प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, रोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं। इसके लिए उद्योगों, संस्थानों एवं व्यावसायिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जेपीएल के माध्यम से की जा रही पहल इसी दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में उत्साह का वातावरण तैयार करना और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना है। छोटी-छोटी पहल बड़े बदलाव की नींव रखती हैं।
प्रो. सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों में उत्साह, नवाचार और सहभागिता का वातावरण तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय का मजबूत विकास रोडमैप बनाया जाएगा। इसके लिए सभी विभागों से सुझाव और इनपुट लिए जाएंगे। प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोजन एवं कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रभावी प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।
बैठक में विभिन्न विभागों के शैक्षणिक, प्रशासनिक एवं विकासात्मक विषयों पर भी चर्चा हुई। कुलपति ने सभी शिक्षकों और विभागों से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा करते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से विश्वविद्यालय को शैक्षणिक उत्कृष्टता, विद्यार्थियों की उपलब्धियों और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई जा सकती है।----------------