सावन के पहले सोमवार की पूर्व संध्या पर केसरियामय हुई काशी, 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंजे गंगाघाट

भोर की मंगल आरती के बाद सुकर्मा एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक -पहले सोमवार पर शंकर स्वरूप में देंगे दर्शन, सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को मिला अभूतपूर्व विस्तार

सावन के पहले सोमवार की पूर्व संध्या पर केसरियामय हुई काशी, 'हर-हर महादेव' के जयघोष से गूंजे गंगाघाट

वाराणसी, 02 अगस्त । सावन माह के पहले सोमवार की पूर्व संध्या पर उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी (काशी) पूरी तरह शिवमय और केसरियामय हो गई। रविवार तड़के से ही हजारों कांवड़ियों के जत्थे वाराणसी पहुंचने लगे और देर रात तक उनके आने का सिलसिला अनवरत जारी रहेगा । 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के जयघोष से गंगाघाटों, प्रमुख मार्गों और बाबा विश्वनाथ धाम का पूरा क्षेत्र गुंजायमान है।

बाबा के जलाभिषेक का उत्साह, थकान पर भारी रही आस्था

लंबी पैदल यात्रा से सूजे पांव और छालों के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। रास्ते में कुछ देर विश्राम के बाद कांवड़िए पुनः बाबा विश्वनाथ के दरबार की ओर बढ़ते रहे। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं शिवभक्तों द्वारा चितरंजन पार्क (दशाश्वमेध), गोदौलिया सहित कई स्थानों पर कांवड़ियों के लिए जलपान, चिकित्सा और विश्राम की व्यवस्था की गई है।

गंगाघाटों पर आस्था का सैलाब

दशाश्वमेध, प्राचीन शीतला एवं राजेंद्र प्रसाद घाट पर गंगा के बढ़े जलस्तर के बावजूद श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई और कांवड़ में गंगाजल भरकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए मंदिर के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर कतारबद्ध होते रहे।

पहले सोमवार के जलाभिषेक के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

भगवान शिव को अत्यंत प्रिय सावन के पहले सोमवार पर जलाभिषेक करने की लालसा एक दिन पहले से ही स्पष्ट दिखाई देने लगी। वाराणसी, आसपास के जिलों के अलावा बिहार और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़ लेकर काशी पहुंच रहे हैं।

प्रयागराज संगम से पवित्र जल लेकर लगभग 125 किलोमीटर की पदयात्रा करने वाले हजारों कांवड़िए भी सोमवार तक काशी पहुंचने की तैयारी में हैं। इनमें बड़ी संख्या में डाक बम भी शामिल हैं, जो तेज गति से दौड़ते हुए यात्रा पूरी करते हैं। गोदौलिया क्षेत्र में बनाए गए बैरिकेडिंग के भीतर रविवार से ही कांवड़ियों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गईं।

सुकर्मा एवं सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा जलाभिषेक

इस वर्ष सावन के पहले सोमवार को सुकर्मा योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस योग में भगवान शिव का जलाभिषेक अत्यंत फलदायी माना जाता है। यही कारण है कि कांवड़ियों के साथ-साथ स्थानीय श्रद्धालुओं में भी विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

काशी के सभी शिवालयों में भोर से शुरू होगा जलाभिषेक

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के अलावा तिलभांडेश्वर महादेव, गौरी केदारेश्वर महादेव, महामृत्युंजय महादेव, बैजनाथ महादेव, जागेश्वर महादेव, सारनाथ स्थित सारंगदेव महादेव, शूलटंकेश्वर महादेव सहित काशी के सभी प्रमुख शिवालयों में सोमवार तड़के मंगल आरती के बाद जलाभिषेक और पूजन-अर्चन का क्रम प्रारंभ हो जाएगा।

चार सोमवार, चार दिव्य स्वरूपों में होंगे बाबा के दर्शन

श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार बाबा विश्वनाथ विशेष श्रृंगार में भक्तों को दर्शन देंगे। पहले सोमवार को भगवान शंकर स्वरूप, दूसरे सोमवार को गौरी-शंकर, तीसरे सोमवार को अर्धनारीश्वर तथा चौथे सोमवार को रुद्राक्ष श्रृंगार में दर्शन देंगे। वहीं श्रावणी पूर्णिमा पर झूला श्रृंगार और रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष दर्शन-पूजन की व्यवस्था रहेगी। इन दिव्य श्रृंगारों के दर्शन के लिए प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

इस बार 80 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

पिछले वर्ष सावन माह में 63 लाख 6 हजार 631 श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे। इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या 70 लाख का आंकड़ा पार कर 80 लाख तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था, हर गतिविधि पर रहेगी नजर

श्रावण मास को देखते हुए काशी विश्वनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप दिया गया है। पूरे धाम और उससे जुड़े मार्गों पर 289 सीसीटीवी कैमरों के साथ 44 अतिरिक्त कैमरे लगाए गए हैं। गोदौलिया से मैदागिन तक प्रत्येक गतिविधि पर मंदिर कंट्रोल रूम और पुलिस कंट्रोल रूम से चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों की सतत तैनाती और त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।-------