जंतर-मंतर प्रदर्शन में पत्रकारों से कथित दुर्व्यवहार पर प्रेस क्लब सख्त, कार्रवाई और पारदर्शिता की मांग
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की निंदा की, इंटरनेट निलंबन पर भी जताई आपत्ति; मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को सौंपी गई।
नई दिल्ली, 05 अक्टूबर । प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार की कड़ी निंदा की है।
पीसीआई ने शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की और विरोध स्थल के आसपास इंटरनेट निलंबन की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मनमाने तरीके से सूचना का प्रवाह रोकना अस्वीकार्य है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग थाने में मिली शिकायतों की जांच अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी है। विशेष जांच दल घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज, पत्रकारों एवं प्रत्यक्षदर्शियों के वीडियो तथा ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के रिकॉर्ड की पड़ताल करेगा। इससे पहले, एफआईआर दर्ज करने में देरी के विरोध में छात्र संगठनों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों ने रविवार रातभर संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया, जिसके बाद आज सुबह से ही क्षेत्र में सुरक्षा बल बढ़ा दिए गए।
विपक्षी दलों और नागरिक समूहों का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में योग्य मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, हालांकि चुनाव आयोग ने इसे खारिज करते हुए नियमों के तहत संशोधन की बात कही है। आंदोलन के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं आतिशी, सौरभ भारद्वाज समेत एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण जैसे प्रमुख कार्यकर्ताओं तथा कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
इस बीच, जंतर-मंतर पर कई पुलिसकर्मियों के वर्दी पर नेम-टैग न पहनने को लेकर नया विवाद भी सामने आया है। अधिकारियों के मुताबिक, 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शनों के बाद सोशल मीडिया पर पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों को निशाना बनाए जाने तथा ट्रोलिंग से बचाने के लिए यह सचेत कदम उठाया गया था। वहीं, प्रदर्शनकारियों और विधिक विशेषज्ञों ने पुलिस की इस कार्रवाई को पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों के विपरीत बताया है।