प्रयागराज SRN अस्पताल में जटिल ऑपरेशन, 25 वर्षीय युवती के गर्भाशय से निकलीं 13 फाइब्रॉएड की गांठें
डॉक्टरों ने मायोमेक्टोमी के जरिए सभी गांठें निकालते हुए गर्भाशय को सुरक्षित रखा, ऑपरेशन के बाद युवती की हालत संतोषजनक बताई गई।
प्रयागराज, 28 सितंबर ।स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के चिकित्सकों ने जटिल ऑपरेशन कर 25 वर्षीय युवती के गर्भाशय से 13 फाइब्रॉएड (गांठें) सफलतापूर्वक निकाल दीं। चिकित्सकों ने ऑपरेशन के दौरान गर्भाशय को सुरक्षित रखा। इससे युवती के भविष्य में गर्भधारण की संभावनाओं को बनाए रखने में मदद मिलेगी। ऑपरेशन के बाद युवती की स्थिति संतोषजनक है और चिकित्सकीय निगरानी में उसका उपचार किया जा रहा है।
युवती काफी समय से गर्भाशय में मौजूद छोटी-बड़ी गांठों के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रही थी। जांच के दौरान उसके गर्भाशय में कई फाइब्रॉएड पाए गए। इसके बाद चिकित्सकों ने गांठों को निकालने के साथ गर्भाशय को सुरक्षित रखने के लिए मायोमेक्टोमी करने का निर्णय लिया।
एसआरएन अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. शक्ति जैन ने अपनी टीम के साथ सावधानीपूर्वक ऑपरेशन किया। करीब 13 अलग-अलग आकार की गांठों को गर्भाशय से निकाला गया। एक साथ इतनी अधिक संख्या में गांठों को निकालना चुनौतीपूर्ण था। ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव को नियंत्रित करने और गर्भाशय को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया गया।
डॉ. शक्ति जैन ने बताया कि युवती के गर्भाशय में अलग-अलग आकार की कुल 13 गांठें थीं। गर्भाशय को सुरक्षित रखते हुए सभी गांठों को निकालना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम ने पूरी सावधानी और कुशलता से ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया। मरीज की स्थिति संतोषजनक है। गर्भाशय सुरक्षित रहने से भविष्य में उसकी प्रजनन क्षमता को बनाए रखने में सहायता मिलेगी। ऑपरेशन में डॉ. वंदना ओझा, डॉ. दीपशिखा और डॉ. प्रियंका चौधरी ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. धर्मेंद्र यादव और डॉ. आरती सिंह शामिल रहीं।
क्या हैं गर्भाशय की गांठें
चिकित्सकीय भाषा में गर्भाशय की गांठों को यूटेराइन फाइब्रॉएड कहा जाता है। ये सामान्यतः गर्भाशय की मांसपेशियों से बनने वाली गैर-कैंसरकारी गांठें होती हैं। इनका आकार बहुत छोटा होने से लेकर काफी बड़ा हो सकता है। किसी महिला के गर्भाशय में एक या एक से अधिक फाइब्रॉएड हो सकते हैं।
इनके कारण मासिक धर्म के दौरान अधिक या लंबे समय तक रक्तस्राव, पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन, पेट का आकार बढ़ना, बार-बार पेशाब लगना, कब्ज, कमर दर्द और खून की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ महिलाओं में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते और नियमित जांच या अल्ट्रासाउंड के दौरान इनका पता चलता है।
चिकित्सकों के अनुसार हर फाइब्रॉएड में ऑपरेशन जरूरी नहीं होता। उपचार का निर्णय गांठों की संख्या, आकार और स्थान, मरीज की उम्र, लक्षण तथा भविष्य में गर्भधारण की इच्छा के आधार पर किया जाता है। मायोमेक्टोमी में गांठों को निकालकर गर्भाशय को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाता है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि मासिक धर्म में अत्यधिक रक्तस्राव, लगातार पेट दर्द, पेट का असामान्य रूप से बढ़ना, अत्यधिक कमजोरी या गर्भधारण में परेशानी होने पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और उचित उपचार से एनीमिया समेत अन्य जटिलताओं से बचाव में मदद मिल सकती है।
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