NLU प्रयागराज जातिगत भेदभाव मामले में चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने सुनवाई से खुद को किया अलग
डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में प्रोफेसर की अपील की सुनवाई से चीफ जस्टिस अलग हुए; कोर्ट ने अगली सुनवाई तक रिट कार्यवाही पर रोक जारी रखी।
प्रयागराज, 30 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली ने खुद को उस अपील की सुनवाई से अलग कर लिया, जिसमें एक प्रोफेसर ने सिंगल जज के उस आदेश के खिलाफ दायर की थी, जिसमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, प्रयागराज में जाति-आधारित अपमान और भेदभाव के आरोपों की जांच न्यायिक अधिकारियों से कराने का निर्देश दिया गया है।
चीफ जस्टिस भंसाली यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं। यह अपील चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने तब आई, जब इससे पहले एक डिवीजन बेंच ने रिट याचिका में आगे की कार्यवाही पर रोक लगाई और न्यायिक अधिकारियों के ज़रिए आरोपों की जांच कराने के सिंगल जज के फैसले पर सवाल उठाया था। बेंच ने कहा कि यूनिवर्सिटी के 'इक्वल अपॉर्चुनिटी सेल' (समान अवसर सेल) को, पहली नज़र में, आरोपों की जांच करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि स्पेशल अपील की अगली सुनवाई की तारीख तक रिट-सी में आगे की कार्यवाही रुकी रहेगी। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अगर न्यायिक अधिकारियों की रिपोर्ट दाखिल की जाती है तो उसे सीलबंद लिफ़ाफ़े में रखा जाए। यह मामला दो छात्रों - एक पी एचडी रिसर्च स्कॉलर और पांचवें सेमेस्टर के बीए छात्र (जो यूनिवर्सिटी का एलएलबी (ऑनर्स) छात्र भी है) - द्वारा लॉ डिपार्टमेंट के हेड और बॉयज़ हॉस्टल के वार्डन (प्रतिवादी नंबर 6/अपीलकर्ता) के खिलाफ उठाए गए मुद्दों से जुड़ा है।
उनकी शिकायत थी कि प्रतिवादी नंबर 6 (जो अब हाईकोर्ट में अपीलकर्ता हैं/डॉ. दीपक शर्मा) ने अपने एकेडमिक और प्रशासनिक अधिकार का इस्तेमाल "जाति-आधारित अपमान और बदले की भावना" के हथियार के तौर पर किया। पांचवें सेमेस्टर के छात्र ने 20 अगस्त, 2026 को वाइस-चांसलर को शिकायत सौंपी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि बार-बार याद दिलाने और और शिकायतें करने के बावजूद यूनिवर्सिटी ने उसकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की।