UPI चार्ज पर मायावती का विरोध, बोलीं—आम जनता की जेब पर बढ़ेगा बोझ
15 अक्टूबर से चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होने वाले नए शुल्क ढांचे पर बसपा प्रमुख ने जताई चिंता। स्मार्ट स्कूल योजना पर भी प्रतिक्रिया देते हुए पहले बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की।
लखनऊ, 18 सितंबर । बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने 15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए यूपीआई शुल्क ढांचे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने के बाद शुल्क ढांचा लागू करने से अंततः आम जनता पर खर्च का बोझ बढ़ सकता है।
मायावती ने शुक्रवार को एक्स पर पोस्ट कर कहा कि यूपीआई डिजिटल लेनदेन को पहले खूब बढ़ावा देने के बाद अब उस पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था से लोगों में बेचैनी और आक्रोश स्वाभाविक है। उन्होंने इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसे चाहे जो नाम दिया जाए, अंततः इसका असर आमजन की जेब पर पड़ सकता है।
मायावती ने कहा कि देश की बहुसंख्यक आबादी गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे में सरकार की नीति और कार्ययोजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक व्यवस्था की बजाय कल्याणकारी अधिक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की आर्थिक तंगी और दुख-तकलीफ की चिंता सरकार को करनी चाहिए।
मायावती ने उत्तर प्रदेश सरकार की करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से लगभग 14,500 स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा का भी जिक्र किया। उन्होंने इसे अच्छी पहल बताते हुए कहा कि बच्चों को स्मार्ट पढ़ाई उपलब्ध कराने से पहले स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए।
बसपा प्रमुख ने कहा कि स्कूली बच्चों के लिए भवन, बेंच-कुर्सी, किताबें, शौचालय, खेल मैदान और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त करना जरूरी है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये की लागत में इन सभी बुनियादी जरूरतों को पूरा करना कितना संभव होगा, इस पर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि नई यूपीआई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से चुनिंदा मर्चेंट लेनदेन में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू होगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (पी2पी) लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और 2,000 रुपये तक के मर्चेंट लेनदेन भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुसार लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट यूपीआई लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे।----