न्यायपालिका में हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर, ब्रजेश पाठक बोले- आमजन के लिए न्याय व्यवस्था बने सहज
लखनऊ में हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी समेत भारतीय भाषाओं के व्यापक प्रयोग की आवश्यकता बताई।
लखनऊ, 28 सितंबर। अवध बार एसोसिएशन उच्च न्यायालय एवं उत्तर प्रदेश हिंदी विधि प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में ‘न्यायपालिका में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने में वास्तविक अवरोध’ विषय पर विचार-विमर्श किया गया।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी हमारी मातृभाषा है और न्यायपालिका में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं और अभिव्यक्ति का माध्यम है। हिंदी की विशेषता है कि वह सभी को स्वीकार करती है और हिंदी सबकी भाषा है।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आजादी के बाद देश में जब पहली बार चुनाव हुआ, तब चुनाव लड़ने वाले लोगों में बड़ी संख्या अधिवक्ताओं की थी। उन्होंने कहा कि देश के लोकतांत्रिक और संवैधानिक विकास में अधिवक्ता समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था में आमजन की सहज भागीदारी और समझ को बढ़ाने के लिए सरल एवं सुगम भाषा का प्रयोग भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चली औपनिवेशिक व्यवस्था के प्रभाव के कारण अंग्रेजी को एक विशेष वर्ग की भाषा के रूप में स्थापित किया गया। अब आवश्यकता है कि भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी को न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्यों में अधिक व्यापक स्थान मिले, ताकि आम नागरिक न्याय व्यवस्था से स्वयं को और अधिक सहजता से जोड़ सके।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी, कार्यक्रम संयोजक एवं अवध बार एसोसिएशन एल्डर कमेटी के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद आरिफ खान, अध्यक्ष, हिंदी विधि प्रतिष्ठान देश रतन मिश्रा, संचालक एस.एस. चौबे सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।