भागवत जीवन का सत्य समझाती है, मृत्यु अंत नहीं नए आरंभ का द्वार: बटुक महाराज
कीडगंज में श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता और राजा परीक्षित के मोक्ष का प्रसंग सुनाया गया।
प्रयागराज, 06 अक्टूबर । भागवत मनुष्य को सत्य का दर्शन कराती है और जीवन के वास्तविक स्वरूप का बोध कराती है। मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए आरंभ का द्वार है। जीवन जन्म-जन्मांतर के चक्र से जुड़ा है, जो मनुष्य के कर्मों के आधार पर आगे बढ़ता है। यह विचार पूज्य बटुक महाराज ने मंगलवार को श्री ज्ञान पुस्तकालय, कीडगंज के प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस व्यक्त किए।
प्राचीन श्री दधिकांदो मेला कमेटी कृष्णानगर, त्रिवेणी मार्ग, कीडगंज की ओर से आयोजित कथा में बटुक महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि सच्ची मित्रता निस्वार्थ भाव और एक-दूसरे के प्रति समर्पण पर आधारित होती है। श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता समाज को प्रेम, विश्वास और समर्पण का संदेश देती है।
उन्होंने कहा कि जब राजा परीक्षित को जीवन के सत्य का दर्शन प्राप्त हुआ तो उनके मन से मृत्यु का भय समाप्त हो गया और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई। भागवत मनुष्य को जीवन की वास्तविकता समझाते हुए सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का प्रसंग भी सुनाया गया।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भगवान की आरती और पूजन किया। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, महापौर गणेश केसरवानी, विधायक हर्षवर्धन बाजपेई, पूर्व पार्षद सविता केसरवानी, भाजपा नेता सैफुल अब्बास, पप्पू केसरवानी कटरा, मनीष केसरवानी, सुशील जैन, अजय जायसवाल, राजेश केसरवानी, बांबी, खन्ने सोनकर, अमरेश जायसवाल, कृष्णा साहू, अंकुश शर्मा, ईशू केसरवानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी राजेश केसरवानी ने बताया कि 07 अक्टूबर को सुबह 11 बजे भागवत कथा की पूर्णाहुति यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा।