इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वित्तीय गड़बड़ी के दोषी बैंक कर्मचारियों की ग्रेच्युटी जब्ती बरकरार

बैंक को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाले 3 कर्मचारियों को झटका, हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी वापस करने के आदेश किए रद्द

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वित्तीय गड़बड़ी के दोषी बैंक कर्मचारियों की ग्रेच्युटी जब्ती बरकरार

प्रयागराज, 27 अगस्त । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वांचल बैंक (अब यूपी ग्रामीण बैंक) से जुड़ी तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन तीन बर्खास्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी वापस दिलाने के नियंत्रक प्राधिकारी के आदेशों को रद्द कर दिया है, जिन पर बैंक को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का आरोप साबित हुआ था। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह आदेश दिया।

बैंक कर्मी रामचंद्र केराल (करीब 92.97 लाख रुपये की क्षति), पीयूष कुमार पांडेय (करीब 61.49 लाख रुपये) और रामसरन दुबे (करीब 10 लाख रुपये के विरुद्ध विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितता का आरोप सिद्ध हुआ था, जिसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर उनकी ग्रेच्युटी जब्त करने का आदेश पारित किया गया था। कर्मचारियों की बर्खास्तगी के विरुद्ध अपीलें भी खारिज हो चुकी थीं और उन्होंने आगे चुनौती नहीं दी।

हालांकि, जब तक बैंक ग्रेच्युटी जब्त करने की कार्यवाही शुरू करता, तब तक कर्मचारियों ने भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के तहत नियंत्रक प्राधिकारी के समक्ष याचिका दाखिल कर दी थी। नियंत्रक प्राधिकारी ने यह कहते हुए पूरी ग्रेच्युटी ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया कि बैंक का जब्ती आदेश तब पारित हुआ जब मामला पहले से ही प्राधिकारी के समक्ष लंबित था।

कोर्ट ने कहा कि भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम की धारा 4(6) के तहत नियोक्ता को यह अधिकार है कि यदि कर्मचारी के दुराचार से वित्तीय क्षति हुई हो तो उतनी सीमा तक (या क्षति ग्रेच्युटी राशि से अधिक होने पर पूरी) ग्रेच्युटी जब्त की जा सके। नियंत्रक प्राधिकारी के समक्ष कार्यवाही लंबित होना बैंक को जब्ती आदेश पारित करने से नहीं रोकता।

कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पूर्वांचल ग्रामीण बैंक (अधिकारी एवं कर्मचारी) सेवा विनियमावली, 2010 के विनियम 72 में भी स्पष्ट प्रावधान है कि दुराचार से वित्तीय हानि होने की स्थिति में उतनी सीमा तक ग्रेच्युटी जब्त की जा सकती है।

कोर्ट ने माना कि तीनों मामलों में बैंक द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी करने, जवाब मांगने और नियमानुसार अंतिम आदेश पारित करने के बाद ग्रेच्युटी जब्त की गई थी, इसलिए नियंत्रक प्राधिकारी के आदेश 19.अगस्त.2015, 30.दिसंबर .2016 और 16.अप्रैल.2018 विधिक रूप से त्रुटिपूर्ण हैं और रद्द किए जाते हैं। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निजी प्रत्यर्थी जब्ती आदेश को कानूनी रूप से उपलब्ध किसी अन्य उपाय से चुनौती देना चाहें, तो यह आदेश उसमें बाधा नहीं बनेगा। तीनों याचिकाएं इसी के साथ निस्तारित कर दी गईं।