प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले पर हाइकोर्ट ने उप्र सरकार से मांगा पूरा ब्यौरा
प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले पर हाइकोर्ट ने उप्र सरकार से मांगा पूरा ब्यौरा
प्रयागराज, 26 अगस्त । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई एक्ट, 2009) के तहत दाखिला दिए जाने के मामले में राज्य सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यह आदेश सेंट जॉन्स स्कूल, बभनौटी, पछवां द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।
अदालत के संज्ञान में लाया गया कि राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त कई निजी शिक्षण संस्थान कमजोर वर्ग के बच्चों को दाखिला देने और उनकी फीस माफ करने से कतरा रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर आरोपों की सत्यता पर कोई राय नहीं दी जा रही, बल्कि राज्य सरकार से मंगाया गया हलफनामा वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगा।
आदेश में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जूनियर बेसिक स्कूल (कक्षा 5 तक) और जूनियर हाई स्कूल (कक्षा 6 से 8 तक) किस तरह परिभाषित हैं। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि सीबीएसई, सीआईएससीई या किसी अन्य बोर्ड से संबद्ध स्कूल भी राज्य सरकार से "नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट" लेने के बाद ही स्थापित और संचालित हो सकते हैं और इसलिए वे भी उन्हीं दायित्वों के अधीन हैं जो अन्य स्कूलों पर लागू होते हैं , भले ही वे किसी दूसरे बोर्ड से संबद्ध क्यों न हों।
राज्य सरकार को जिलावार हलफनामे में निम्नलिखित जानकारी देनी होगी।
1-राज्य में संचालित सभी सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी प्राथमिक स्कूलों की सूची, चाहे वे किसी भी बोर्ड से संबद्ध हों
2- प्रत्येक स्कूल में जूनियर बेसिक, जूनियर हाई स्कूल, हाई स्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर छात्रों की संख्या।
3- पिछले पांच शैक्षणिक सत्रों का स्कूलवार ब्यौरा वास्तव में दाखिल हुए बच्चों की संख्या, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आवंटित किंतु दाखिला न दिए गए बच्चों की संख्या व उसके कारण
4-कैपिटेशन फीस वसूलने या स्क्रीनिंग प्रक्रिया अपनाने संबंधी शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण
कोर्ट ने सीबीएसई और सीआईएससीई से संबद्ध स्कूलों को भी बेसिक शिक्षा अधिकारी और जिला विद्यालय निरीक्षक को यह जानकारी देने में सहयोग करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी केवल पूरी तस्वीर समझने के लिए मांगी गई है और किसी संस्थान के आचरण पर अभी कोई राय व्यक्त नहीं की गई है। आदेश की प्रति प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा), निदेशक (बेसिक) व निदेशक (माध्यमिक) शिक्षा तथा सीबीएसई और सीआईएससीई के संबंधित कार्यालयों को भेजी जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को दोपहर दो बजे नियत की गई है।