हाईकोर्ट : राशन वितरण में गड़बड़ी पर कोटेदार का लाइसेंस रद्द करने का आदेश बरकरार
हाईकोर्ट : राशन वितरण में गड़बड़ी पर कोटेदार का लाइसेंस रद्द करने का आदेश बरकरार
प्रयागराज, 21 जुलाई । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बूदन लाल उचित मूल्य दुकान (कोटेदार) के लाइसेंस को रद्द करने की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह आदेश दिया।
शिकायत मिली थी कि याची ने 06 महीने से अधिक समय तक कई राशन कार्ड धारकों को अनाज नहीं दिया। जांच में पाया गया कि अगस्त और सितंबर 2017 के वितरण रजिस्टर में गड़बड़ियां थीं जैसे 17 कार्डधारकों को अनाज देना दर्ज था, लेकिन केवल 13 के हस्ताक्षर मौजूद थे। मिट्टी के तेल (केरोसिन) के वितरण का रजिस्टर भी पेश नहीं किया गया।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं लिखित बयान में स्वीकार किया था कि उसने कुछ राशन कार्डों पर बिना अनाज दिए फर्जी प्रविष्टि कर दी थी।
9 मार्च 2018 को लाइसेंसिंग अथॉरिटी ने कोटेदार का अनुबंध रद्द कर दिया और 17 अक्टूबर 2018 को अपील भी खारिज हो गई।
याची ने कहा कि वह दिव्यांग है, नियमित रूप से अनाज बांटता रहा है, और कार्डधारकों के बयान दबाव में दर्ज कराए गए थे। कुछ कार्डधारकों के शपथ-पत्र भी पेश किए गए जिनमें कहा गया कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई।
कोर्ट ने पाया कि पेश किए गए शपथ-पत्र मूल कार्यवाही में प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत नहीं किए गए थे, और वे हस्ताक्षर की बजाय अंगूठा-निशानी वाले, एक जैसे शब्दों में लिखे गए थे। जिससे संदेह पैदा होता है। इसके अलावा, केवल दो शिकायतकर्ताओं के शपथ-पत्र आए जबकि कई अन्य कार्डधारकों की शिकायतें बनी रहीं।
कोर्ट ने कहा कि उचित मूल्य दुकान के विरुद्ध जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन पर्याप्त है और विस्तृत विभागीय जांच जैसी प्रक्रिया आवश्यक नहीं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को पर्याप्त अवसर दिया गया, लेकिन वह गड़बड़ियों को स्पष्ट नहीं कर सका, बल्कि स्वयं दोष स्वीकार किया। सिर्फ दिव्यांग होने के आधार पर आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। याचिका खारिज कर दी गई।