इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: कानपुर में भूमिधरी अधिकार के दावे की 6 सप्ताह में जांच करे SDM

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर के बिठूर स्थित नयापुरवा गांव के दो याचिकाकर्ताओं के भूमिधरी अधिकार के दावे की जांच कर छह सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश एसडीएम सदर को दिया

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: कानपुर में भूमिधरी अधिकार के दावे की 6 सप्ताह में जांच करे SDM

प्रयागराज, 24 जुलाई । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कानपुर नगर के बिठूर स्थित नयापुरवा गांव के दो मकान मालिकों बाबू लाल और दर्शन की याचिका पर सुनवाई करते हुए उप जिलाधिकारी सदर, कानपुर नगर को उनके भूमिधरी अधिकार के दावे की जांच कर छह सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।

केंद्र सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय ने 7 मार्च 2023 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर कानपुर में आउटर रिंग रोड के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की घोषणा की थी। इस अधिसूचना में बाबू लाल के मकान नंबर 142 (150 वर्ग मीटर) और दर्शन (मूल पट्टेदार बख्तावर के वैध उत्तराधिकारी) के मकान नंबर 148 (150 वर्ग मीटर) की भूमि भी शामिल है, जिसे सरकारी भूमि दर्शाया गया है।

याचिकाकर्ताओं ने अधिसूचना को रद्द करने, मकान न गिराने, समुचित पुनर्वास और मुआवजे की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।

याचिकाकर्ताओं ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर दावा किया कि यह भूमि वर्ष 1972 में ग्राम सभा भूमि प्रबंधन समिति, ग्राम पैगूपुर बोगर द्वारा हरिजन परिवारों को आवंटित की गई थी। अभिलेखों के अनुसार गांव के 22 हरिजन निवासियों में से 13 भूमिहीनों ने भूमि की मांग की थी, जिनमें बाबू लाल (पुत्र मुल्ला) और बख्तावर (पुत्र दुर्गा) शामिल थे। समिति ने अराजी संख्या 86 की भूमि 150 वर्ग गज प्रति व्यक्ति की दर से आवंटित की थी, और एक साइट मानचित्र में दोनों को सटे हुए भूखंडों का आवंटी दिखाया गया है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि अनुसूचित जाति समुदाय से होने के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 131-बी(2) के तहत भूमिधर का दर्जा प्राप्त हो चुका है, और इसलिए उन्हें केवल मकान की संरचना का नहीं, बल्कि भूमि का भी मुआवजा मिलना चाहिए।

राज्य के स्थायी अधिवक्ता ने भूमिधरी अधिकार के दावे को तथ्य का विवादित प्रश्न बताते हुए कहा कि इसकी जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही की जानी चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिवक्ता ने कहा कि पात्रता तय होने पर विशेष भूमि अर्जन अधिकारी के पास जमा राशि जारी करने में कोई आपत्ति नहीं है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि 1972 के पट्टे से भूमिधरी अधिकार मिला या नहीं, और प्रत्येक याचिकाकर्ता कितनी भूमि के हकदार हैं इन तथ्यात्मक प्रश्नों की जांच उपजिलाधिकारी, तहसील सदर, कानपुर नगर द्वारा की जानी चाहिए। न्यायालय ने निर्देश दिया कि:- एस डी एम छह सप्ताह के भीतर दावे की जांच कर विशेष भूमि अर्जन अधिकारी को रिपोर्ट सौंपें।

- यदि कोई अन्य कानूनी बाधा न हो, तो मकान की संरचना का देय मुआवजा एक सप्ताह के भीतर जारी किया जाए, जबकि भूमि संबंधी अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी के फैसले पर निर्भर रहेगा। इन निर्देशों के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया गया।