CCTV रिकॉर्डिंग न मिलने पर पुलिस पर भड़का हाईकोर्ट, जज बोले- ‘झूठों का झुंड’; थाना प्रभारी के वेतन से वसूला जाएगा ₹65 हजार

देवरिया के गौरी बाजार थाने में कथित अवैध हिरासत के मामले में SP और थाना प्रभारी को कोर्ट में पेश होना पड़ा; CCTV खराबी की GD में एंट्री न होने पर हाईकोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी।

CCTV रिकॉर्डिंग न मिलने पर पुलिस पर भड़का हाईकोर्ट, जज बोले- ‘झूठों का झुंड’; थाना प्रभारी के वेतन से वसूला जाएगा ₹65 हजार

प्रयागराज, 09 सितंबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने देवरिया जिले के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने थाने के सीसीटीवी कैमरों के खराब होने और हिरासत की अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं होने को लेकर थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक से तीखे सवाल किए। सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अधिकारियों की सफाई पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से उन्हें 'झूठों का झुंड' तक कह दिया।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की पीठ चार याचिकाकर्ताओं महेंद्र गौर एवं तीन अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोप है कि चारों को 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग अवधि के लिए गौरी बाजार थाने में अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इनमें कुछ लोगों को करीब 10 दिन तक हिरासत में रखे जाने का आरोप है। हाईकोर्ट ने पहले थाने के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग पेश करने का आदेश दिया, ताकि याचिका में लगाए गए आरोपों की सच्चाई का पता लगाया जा सके।

लेकिन 2 सितंबर को राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि कथित घटना से पहले ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग व्यवस्था में खराबी आ गई। इसके बाद कोर्ट ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया। बुधवार को सुनवाई के दौरान पीठ ने थाना प्रभारी से बार-बार पूछा कि सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग कहां है। कोर्ट ने सवाल किया, "अगर कैमरा 14 अप्रैल से काम कर रहा था तो रिकॉर्डिंग कहां है? आप दो महीने से थाना प्रभारी थे। रिकॉर्डिंग कहां है?"

थाना प्रभारी ने बताया कि सीसीटीवी व्यवस्था 12 अप्रैल 2026 को खराब हो गई थी। कोर्ट ने पूछा कि कैमरे की मरम्मत को लेकर सामान्य डायरी में कोई प्रविष्टि की गई थी या नहीं। थाना प्रभारी ने कहा कि ऐसी कोई प्रविष्टि नहीं की गई। पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट को बताया कि उन्हें सीसीटीवी व्यवस्था के काम नहीं करने की जानकारी नहीं दी गई। इस पर पीठ ने उनसे पूछा कि थाना प्रभारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। जब पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट से माफी मांगी तो जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा,

"कोर्ट से माफी मत मांगिए। लोगों से माफी मांगिए।" पीठ ने पूछा कि क्या थाना प्रभारी को निलंबित किया गया या उनकी सेवा समाप्त की गई। जस्टिस श्रीधरन ने मौखिक टिप्पणी की कि जिस थाने के प्रभारी को सामान्य डायरी में जांच तक दर्ज करना नहीं आता, उसे सेवा में नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसा व्यक्ति सिपाही बनने के भी योग्य नहीं है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि थाना प्रभारी को अपराध शाखा भेज दिया गया। हालांकि, कोर्ट इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ और पूछा कि यदि थाना प्रभारी को दोषी पाया गया था तो उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। पीठ ने इससे पहले 2 सितंबर के अपने आदेश में भी पुलिस के रुख पर गंभीर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि देवरिया जिले के थानों के लिए राज्य सरकार ने 46 लाख रुपये जारी किए। हालांकि, संबंधित हलफनामे में यह नहीं बताया गया कि यह रकम किस तारीख को जारी की गई।

उच्च न्यायालय ने रकम जारी किए जाने की तारीख को जरूरी और महत्वपूर्ण बताते हुए यह भी नोट किया कि पुलिस अधीक्षक की ओर से की गई बताई गई कार्रवाई 14 अगस्त 2026 की है, जबकि हाईकोर्ट का संबंधित आदेश 4 अगस्त को पारित हुआ था। कोर्ट ने प्रथमदृष्टया कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि जिला अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर होने और 4 अगस्त के आदेश के बाद ही कार्रवाई शुरू की।

बुधवार को पीठ ने सीसीटीवी व्यवस्था लगाने वाली एजेंसी को किए गए भुगतान पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब काम पूरा नहीं हुआ था तो पूरी रकम क्यों जारी कर दी गई। पीठ ने टिप्पणी की कि एजेंसी को ब्लैकलिस्ट में डालने के बजाय पूरी राशि जारी कर दी गई और केवल आश्वासन के आधार पर भुगतान कर दिया गया। अवैध हिरासत के मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को चारों याचिकाकर्ताओं को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। याचिकाकर्ता संख्या 2, 3 और 4 को 20-20 हजार रुपये तथा याचिकाकर्ता संख्या 1 को 5 हजार रुपये दिए जाएंगे। कुल 65 हजार रुपये की यह राशि संबंधित थाना प्रभारी के वेतन से

वसूल की जाएगी।