95 बिलियन डॉलर एफडीआई और 38 देशों के साथ एफटीए, भारत बना वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र : जय प्रकाश शिवहरे

95 बिलियन डॉलर एफडीआई और 38 देशों के साथ एफटीए, भारत बना वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र : जय प्रकाश शिवहरे

95 बिलियन डॉलर एफडीआई और 38 देशों के साथ एफटीए, भारत बना वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र : जय प्रकाश शिवहरे

लखनऊ, 09 जून । भारत आज विश्व की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तथा प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में देश की आर्थिक विकास दर अधिक तेज है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों एवं व्यापक आर्थिक सुधारों के परिणामस्वरूप भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है। देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में लगभग 95 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है।

यह महत्वपूर्ण बातें मंगलवार को भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग( डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने प्रेस कांफ्रेंस में कही। यह प्रेस कांफ्रेंस भारत सरकार के गौरवशाली 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत लखनऊ स्थित गोमती नगर के पिकअप भवन में "एफडीआई एवं निवेश प्रोत्साहन" विषय पर की गयी। इसमें भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ( डीपीआईआईटी) के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे, उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग सह मुख्य कार्यपालक अधिकारी, इन्वेस्ट यूपी विजय किरण आनंद (आईएएस) व पत्र सूचना कार्यालय के निदेशक दिलीप कुमार शुक्ल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे ने मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विकसित भारत के निर्माण में निवेश प्रोत्साहन, औद्योगिक विकास तथा व्यापार सुगमता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की शीर्ष पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है तथा प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में देश की आर्थिक विकास दर अधिक तेज है। शिवहरे ने कहा कि सरकार की दूरदर्शी नीतियों एवं व्यापक आर्थिक सुधारों के परिणामस्वरूप भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के रूप में लगभग 95 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ है।

संयुक्त सचिव ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में "ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस" को बेहतर बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। उन्होंने कहा कि डीपीआईआईटी द्वारा उद्योगों के लिए प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाया गया है, जिसके परिणामस्वरूप देश में निवेश और स्टार्टअप्स का मजबूत इकोसिस्टम विकसित हुआ है। शिवहरे ने कहा कि आज भारत के साथ-साथ दुनिया भर के स्टार्टअप्स के लिए भी देश नई संभावनाओं का केंद्र बन रहा है।

उन्होंने "जन विश्वास" अभियान के अंतर्गत किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जन विश्वास 1 और 2 के माध्यम से अनेक नियमों एवं प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया, जिससे उद्योगों को बड़ी सुविधा मिली है। केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर अब "जन विश्वास 3" की दिशा में भी पहल शुरू कर दी गई है, जिससे उद्योगों के लिए और अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा। औद्योगिक विकास के संबंध में उन्होंने बताया कि इंडस्ट्रियल कॉरिडोर योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और इसी क्रम में इस वर्ष के बजट में देशभर में 100 नए इंडस्ट्रियल टाउन विकसित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। यह पहल विनिर्माण क्षेत्र को नई गति देने के साथ-साथ रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगी।

वैश्विक व्यापार पर चर्चा करते हुए संयुक्त सचिव शिवहरे ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों में भारत ने रिकॉर्ड 9 मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) किए हैं, जिनके दायरे में विश्व के 38 देश शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन समझौतों के लागू होने तथा शुल्कों में कमी के बाद सरकार का ध्यान भारतीय उत्पादों और व्यापारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसरों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि सरकार की पारदर्शी एवं निवेश-अनुकूल नीतियों के कारण अब देश के प्रत्येक राज्य में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिससे संतुलित एवं समावेशी विकास को बल मिल रहा है।

संयुक्त सचिव ने बताया कि भारत सरकार का मंत्रालय देश के विभिन्न राज्यों में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद स्थापित कर रहा है तथा उन्हें सरकार की नई नीतियों, सुधारों एवं निवेश संबंधी अवसरों की जानकारी प्रदान कर रहा है। संयुक्त सचिव शिवहरे ने कहा कि निवेश प्रोत्साहन, व्यापार सुगमता, औद्योगिक सुधारों और वैश्विक साझेदारियों के माध्यम से भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा आने वाले वर्षों में विश्व अर्थव्यवस्था में और अधिक सशक्त भूमिका निभाएगा।