दुर्लभ पांडुलिपियों के अध्ययन से शोध को मिलेगी नई दिशा: प्रो. हरिदत्त शर्मा
सीएमपी महाविद्यालय में शिव आधारित पांडुलिपियों की चित्र प्रदर्शनी, विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
प्रयागराज, 13 अगस्त । प्राचीन पांडुलिपियां भारतीय ज्ञान, संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनमें विभिन्न विषयों से संबंधित दुर्लभ सामग्री सुरक्षित है। उक्त बात गुरुवार को सीएमपी महाविद्यालय में आयोजित पांडुलिपि प्रदर्शनी के उद्घाटन के मौके पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. हरिदत्त शर्मा ने कहा।
उन्होंने कहा कि राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय में दुर्लभ पांडुलिपियों का विशाल संग्रह है। शोध छात्रों और आचार्यों को पुस्तकालय का भ्रमण कर अपने शोध से संबंधित पांडुलिपियों का अध्ययन करना चाहिए। इससे उनके शोध कार्य को नई दिशा मिलेगी। शोधार्थियों को इन पांडुलिपियों का अध्ययन कर अपने शोध को और समृद्ध करना चाहिए।
सीएमपी महाविद्यालय के संस्कृत विभाग की ओर से ‘भारतीय संस्कृति में शिव’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। इसी अवसर पर संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय, प्रयागराज की ओर से भगवान शिव पर आधारित दुर्लभ पांडुलिपियों की चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रो. हरिदत्त शर्मा ने किया।
प्रदर्शनी में भगवान शिव से संबंधित कई महत्वपूर्ण पांडुलिपियों के चित्र प्रदर्शित किए गए। इनमें रामचरितमानस की पांडुलिपि में चित्रित भगवान शंकर के चित्र, विश्वनाथ अष्टक, शिव पुराण, शिव संहिता, अर्धनारीश्वर स्तोत्र, महाकाल सहस्रनाम, शिव सहस्रनाम और गिरिजा शतक सहित अनेक पांडुलिपियां शामिल रहीं। इसके अलावा गंगा से संबंधित पांडुलिपियों को भी प्रदर्शनी में स्थान दिया गया।
प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने विशेष रुचि दिखाई। छात्र-छात्राओं ने पांडुलिपियों में लिखे अंशों को ध्यानपूर्वक देखा और महत्वपूर्ण सामग्री को अपनी डायरी में भी नोट किया। विद्यार्थियों ने पांडुलिपियों के विषय, उनकी भाषा और उनमें सुरक्षित प्राचीन ज्ञान के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में सीएमपी महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अजय प्रकाश खरे, पूर्व प्राचार्य प्रो. आनंद कुमार श्रीवास्तव, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कलासंकायाध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर श्रीवास्तव, इलाहाबाद डिग्री कॉलेज के संस्कृत विभाग के आचार्य प्रो. राजेंद्र त्रिपाठी ‘रसराज’, डॉ. सत्यप्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. आरुणेय मिश्र, प्रो. सुरेंद्र पाल सिंह, विभागाध्यक्ष संस्कृत सीएमपी महाविद्यालय, हरिश्चंद्र दुबे, डॉ. शाकिरा तलत, अजय मौर्य, मोहम्मद शफीक और विवेक सहित संस्कृत विभाग के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
राजकीय पांडुलिपि पुस्तकालय के पांडुलिपि अधिकारी गुलाम सरवर ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों से परिचित कराना है।