इलाहाबाद हाईकोर्ट से राज्यसभा तक राधाकांत ओझा का सफर, BJP ने यूपी से बनाया प्रत्याशी

करीब 38 साल की वकालत और दो बार इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा को भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी बनाया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट से राज्यसभा तक राधाकांत ओझा का सफर, BJP ने यूपी से बनाया प्रत्याशी

प्रयागराज, 05 अक्टूबर । इलाहाबाद हाईकोर्ट की अदालतों से निकली कानून की आवाज अब संसद के उच्च सदन तक पहुंचने जा रही है। करीब 38 वर्षों से वकालत कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा प्रत्याशी बनाकर विधि जगत को बड़ा राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया है। उनका नाम सिर्फ प्रयागराज तक सीमित नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट से जुड़े प्रदेशभर के अधिवक्ताओं और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोगों की निगाहें अब इस उम्मीद पर है कि बार के मुद्दों को संसद के व्यापक मंच पर जगह मिलेगी।

बार की आवाज उठाने से लेकर फैसले कराने तक का अनुभव

राधाकांत ओझा ने 1988 में इलाहाबाद हाईकोर्ट से वकालत शुरू की। लंबी विधिक यात्रा के दौरान उन्होंने न्यायालयीन कार्य के साथ अधिवक्ता समुदाय से जुड़े विषयों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वह 2015 में पहली बार और 2021 में दूसरी बार इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए। बार अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल की चर्चा हाईकोर्ट परिसर की सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर भी रही। मल्टीस्टोरी पार्किंग और अधिवक्ता चैंबर जैसे लंबे समय से जरूरत वाले विषयों को शासन और केंद्र के स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। यह अनुभव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिवक्ताओं की रोजमर्रा की समस्याओं से निकली आवाज अब यदि राज्यसभा तक पहुंचती है तो उसका दायरा हाईकोर्ट परिसर से निकलकर पूरे विधि तंत्र और न्यायिक आधारभूत ढांचे तक जा सकता है।

प्रदेश भर के लाखों अधिवक्ताओं की निगाहें

राजनीतिक विश्लेषक सियाराम पांडेय का मानना है कि प्रयागराज स्थित हाईकोर्ट पूर्वांचल समेत प्रदेश के बड़े हिस्से की न्यायिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मीरजापुर, वाराणसी, भदोही, जौनपुर, सोनभद्र, आजमगढ़, गाजीपुर, प्रतापगढ़ सहित तमाम जिलों के अधिवक्ताओं का न्यायिक कार्य हाईकोर्ट से जुड़ा है। ऐसे में बार से निकले वरिष्ठ अधिवक्ता का राज्यसभा प्रत्याशी बनना स्थानीय से कहीं व्यापक विधिक प्रभाव वाला घटनाक्रम है। युवा अधिवक्ताओं के अवसर, अधिवक्ता कल्याण, चैंबर और पुस्तकालय जैसी सुविधाएं, न्यायालय परिसरों का विस्तार, पार्किंग, डिजिटल न्याय व्यवस्था, वादकारियों की सुविधाएं और मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए आधारभूत ढांचा, ऐसे मुद्दे हैं जिन पर विधि जगत की नजर रहती है। ओझा के पास इन समस्याओं को कागज पर पढ़ने के बजाय अदालत और बार में जीने का अनुभव है।

राजनीति में विधि जगत का अनुभवी चेहरा

भाजपा की सूची में ओझा का नाम इसलिए भी अलग है कि उनकी पहचान मुख्य रूप से वकालत और बार नेतृत्व से बनी है। यह चयन उस वर्ग को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व देता है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्याय और कानून के संचालन से सीधे जुड़ा है। राज्यसभा प्रत्याशी के रूप में ओझा के सामने अब वही चुनौती भी है और अवसर भी। बार में उठने वाले मुद्दों को व्यापक नीतिगत विमर्श तक ले जाना। अदालत में कानून की व्याख्या और बार में अधिवक्ताओं के हितों की पैरवी के बाद संसद का मंच उनके अनुभव को नया विस्तार दे सकता है।

अदालत से संसद तक मुद्दों का विस्तार

ओझा का अनुभव अब केवल मुकदमों और बार की बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्यसभा में पहुंचने की स्थिति में अधिवक्ताओं की समस्याओं के साथ न्यायिक आधारभूत ढांचे, लंबित मुकदमों, डिजिटल न्याय व्यवस्था, वादकारियों की सुविधाओं और न्याय तक आसान पहुंच जैसे विषय भी व्यापक नीतिगत विमर्श का हिस्सा बन सकते हैं।

भाजपा की सूची में अलग पहचान

भाजपा ने उत्तर प्रदेश से धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है। सूची में ओझा का नाम प्रयागराज और प्रदेश के विधि जगत के लिए खास महत्व रखता है। बार के गलियारों से संसद के उच्च सदन तक यह सफर इसलिए भी अहम है कि अदालत में कानून की पैरवी करने वाला अनुभव अब कानून बनाने वाली संस्था के विमर्श का हिस्सा बनने जा रहा है।