प्रयागराज में शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का आह्वान- धर्म की रक्षा के लिए भी जागरूक हों हिंदू, रोज एक घंटा-एक रुपये का लें संकल्प
झूंसी स्थित शिवगंगा आश्रम में स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने हिंदुओं से मठ-मंदिरों को शिक्षा, रक्षा और सेवा के केंद्र बनाने की अपील की
प्रयागराज, 05 अक्टूबर । हिंदुओं को केवल जीविका के लिए ही नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए भी जागरूक होना चाहिए। प्रत्येक हिंदू प्रतिदिन एक घंटा और एक रुपये का संकल्प लेकर हिंदू राष्ट्र अभियान में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। उक्त बातें दस दिवसीय प्रवास के दौरान झूंसी स्थित पुरी पीठ के प्रयागराज केंद्र शिवगंगा आश्रम में शिष्यों और श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए गोवर्धन मठ, पुरी, ओडिशा के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहीं।
उन्होंने कहा कि हिंदू अपने आसपास के मठ-मंदिरों को शिक्षा, रक्षा और सेवा के केंद्र बनाएं। यह प्रत्येक हिंदू का कर्तव्य है।
उन्होंने विभिन्न प्रश्नों के उत्तर देते हुए कहा कि विकास के नाम पर होने वाले विनाश को रोकने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए। नदियां लगातार प्रदूषित हो रही हैं। शासन करने वालों का कर्तव्य है कि शिक्षा, रक्षा, अर्थ और सेवा से जुड़े कार्यों के साथ मातृशक्ति के तेज का भी संतुलन बना रहे। इन सभी कार्यों को सही ढंग से क्रियान्वित करने की विद्या सनातन सिद्धांत में निहित है।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने इसी सिद्धांत के प्रति भारत की सामाजिक व्यवस्था को दूषित किया। स्वतंत्रता के बाद भी देश को अपेक्षित शासन तंत्र नहीं मिल सका। इसलिए समाज और राष्ट्र के हित में सनातन सिद्धांतों के अनुरूप व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।
गोवंश की रक्षा से जुड़े प्रश्न पर शंकराचार्य ने कहा कि बैलगाड़ी के युग के समाप्त होने के साथ बैलों की उपयोगिता कम हो गई। जिस प्रजाति की उपयोगिता समाप्त हो जाती है, उसके विलुप्त होने का मार्ग भी प्रशस्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज गोवंश की जो दुर्दशा हो रही है, उसमें प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से समाज का प्रत्येक व्यक्ति भागीदार है। भविष्य में स्वस्थ क्रांति के माध्यम से भारत का निश्चित रूप से शोधन होगा।
उन्होंने हिंदुओं से अपने आसपास के मठ-मंदिरों को शिक्षा, रक्षा और सेवा के केंद्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। कहा कि धर्म, समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूकता के साथ प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
इस अवसर पर शंकराचार्य के निजी सचिव स्वामी निर्विकल्पानंद सरस्वती, प्रफुल्ल ब्रह्मचारी, हृषिकेश ब्रह्मचारी, आचार्य प्रशांत मिश्र, नीरज मिश्र, राम कैलाश पांडेय सहित बड़ी संख्या में शिष्य, श्रद्धालु और युवा उपस्थित रहे।