प्रयागराज: उत्तर मध्य रेलवे ने तैयार किया सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच, हर साल होगी लाखों की बिजली बचत
प्रयागराज में तैयार सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच सेवा में शामिल, हर साल 13,400 यूनिट बिजली उत्पादन और 2.80 लाख रुपये तक की बचत का दावा
प्रयागराज, 23 जुलाई । उत्तर मध्य रेलवे ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच तैयार किया है। यह जानकारी गुरुवार को उमरे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने देते हुए बताया कि इस नई तकनीक से बिजली की बचत होगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
उत्तर मध्य रेलवे ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में एक नई पहल करते हुए सौर ऊर्जा से चलने वाला सोलर-असिस्टेड पैसेंजर कोच तैयार किया है। इस कोच का सफल परीक्षण शुरू हो गया है और इसे 14 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से सेवा में शामिल किया गया।
इस कोच की छत पर 6.93 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल लगाया गया है, जो सूर्य की रोशनी से बिजली बनाकर कोच की बैटरी चार्ज करेगा। इससे पंखे, लाइट और मोबाइल चार्जिंग जैसी सुविधाओं के लिए पारंपरिक बिजली प्रणाली पर निर्भरता कम होगी।
रेलवे के अनुसार, यह सोलर सिस्टम एक वर्ष में करीब 13,400 यूनिट बिजली पैदा करेगा, जिससे प्रति कोच लगभग 2.80 लाख रुपये की बचत होगी। साथ ही हर साल करीब 11 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन भी कम होगा, जिससे पर्यावरण को फायदा मिलेगा।
फिलहाल इस तकनीक का प्रयोग एक आईसीएफ नॉन-एसी पैसेंजर कोच में किया गया है। अगले एक महीने तक इसकी लगातार निगरानी की जाएगी। सफल परिणाम मिलने पर रेलवे हर महीने दो और कोचों में यह सोलर सिस्टम लगाएगा और भविष्य में इसे अन्य पैसेंजर कोचों में भी लागू किया जाएगा।
उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित मालवीय ने बताया कि यह पहल रेलवे को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली की बचत होगी, रखरखाव का खर्च कम होगा और यात्रियों को अधिक भरोसेमंद विद्युत सुविधाएं मिलेंगी। रेलवे भविष्य में इस तकनीक का दायरा और बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।