राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं- मण्डलायुक्त
राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं- मण्डलायुक्त
लखनऊ, 28 जुलाई । मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कहा कि समस्त तहसील प्रभारियों को निर्देश दिए कि वे राजस्व न्यायालयों का नियमित निरीक्षण करें। प्रत्येक वाद का गुण-दोष के आधार पर निष्पक्ष, पारदर्शी एवं नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित कराएं। साथ ही न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के कारणों का विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। राजस्व वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंडलायुक्त मंगलवार को आयुक्त सभागार में राजस्व न्यायालयों द्वारा वादों के निस्तारण, कर एवं करेत्तर राजस्व प्राप्तियों और निर्धारित लक्ष्यों के सापेक्ष विभागवार राजस्व संग्रहण की विस्तृत समीक्षा बैठक कर रहे थे। बैठक में अपर आयुक्त न्यायिक दीप्ति देव यादव, अपर आयुक्त प्रशासन राधे श्याम, मण्डल के सभी जनपदों के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व तथा सम्बन्धित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
मण्डलायुक्त ने जनपदवार उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24, 34, 67, 80 एवं 116 के अंतर्गत पंजीकृत वादों की प्रगति की विस्तृत एवं बिंदुवार समीक्षा की। समीक्षा के दौरान दर्ज वादों के सापेक्ष निस्तारित वादों की संख्या, जनपदवार राजस्व वादों के निस्तारण का प्रतिशत, निर्धारित समयावधि से अधिक अवधि से लंबित वादों की स्थिति तथा तहसीलवार प्रगति का गहन परीक्षण किया गया।
उन्होंने प्रत्येक जनपद के अधिकारियों से लंबित वादों के कारणों की जानकारी प्राप्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्व न्यायालयों में अनावश्यक रूप से लंबित वादों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में सम्मिलित है, अतः इसमें किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।
समीक्षा के दौरान मण्डलायुक्त ने विशेष रूप से 01 वर्ष से अधिक तथा 05 वर्ष से अधिक अवधि से लंबित राजस्व वादों की स्थिति का परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि मण्डल के विभिन्न जनपदों एवं तहसीलों में अभी भी ऐसे वादों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की गति प्रभावित हो रही है। इस स्थिति पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि लंबित वादों की संख्या में अपेक्षित कमी न आना यह दर्शाता है कि जिला एवं तहसील स्तर पर नियमित एवं प्रभावी समीक्षा नहीं की जा रही है।
मण्डलायुक्त ने अविवादित प्रकृति के नामांतरण वादों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रत्येक तहसील में विशेष अभियान संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि आगामी 15 दिनों के भीतर अभियान चलाकर ऐसे समस्त लंबित अविवादित वादों का नियमानुसार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए तथा इसकी दैनिक एवं साप्ताहिक प्रगति की समीक्षा संबंधित उपजिलाधिकारी एवं जिलाधिकारी स्तर पर की जाए। उन्होंने कहा कि अभियान की प्रगति की समीक्षा मण्डल स्तर पर भी नियमित रूप से की जाएगी तथा निर्धारित लक्ष्य प्राप्त न करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।------------------------