कानपुर के 94,476 बुजुर्गों का सहारा बनी योगी सरकार
-वृद्धावस्था पेंशन बनी बुढ़ापे की लाठी, हर महीने 1,000 रुपये की मिल रही आर्थिक मदद-60 साल की उम्र पूरी होने पर पात्र बुजुर्ग उठा सकते हैं योजना का लाभ
कानपुर, 31 जुलाई । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना कानपुर के हजारों बुजुर्गों के लिए बुढ़ापे का मजबूत सहारा बन रही है। जिले में वर्तमान में 94,476 पात्र बुजुर्ग इस योजना का लाभ ले रहे हैं। सरकार की ओर से हर महीने एक हजार रुपये की पेंशन दी जाती है, जो तीन महीने में एक बार तीन रुपये की किस्त के रूप में डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है। इससे बुजुर्गों को रोजमर्रा के खर्च, दवा और अन्य जरूरी जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत मिल रही है।
योगी सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र बुजुर्ग आर्थिक तंगी के कारण परेशान न हो। इसी उद्देश्य से पेंशन की राशि बिना किसी बिचौलिये के सीधे बैंक खातों में भेजी जा रही है। डीबीटी व्यवस्था से पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी है और लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है।
60 साल की उम्र पूरी होने पर मिल सकता है योजना का लाभ
योजना का लाभ 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के ऐसे बुजुर्गों को दिया जाता है, जो उत्तर प्रदेश के निवासी हों और शासन की ओर से तय पात्रता की शर्तों को पूरा करते हों। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के लिए परिवार की वार्षिक आय सीमा 46,080 रुपये और शहरी क्षेत्र के लिए 56,460 रुपये निर्धारित है। साथ ही लाभार्थी किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ नहीं ले रहा हो।
जन सेवा केंद्र से घर के पास ही कर सकते हैं आवेदन
पात्र बुजुर्ग अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र या समाज कल्याण विभाग के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक, आयु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और फोटो जैसे जरूरी दस्तावेज लगाने होते हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद पेंशन की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी शिवम कुमार सागर ने शुक्रवार को बताया कि जिले में कोई भी पात्र बुजुर्ग पेंशन के लाभ से वंचित न रहे, इसके लिए लगातार नए आवेदनों का सत्यापन कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पात्र व्यक्ति जन सेवा केंद्र या समाज कल्याण विभाग के पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। पेंशन की राशि सीधे लाभार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहती है।