मानसिक परेशानी में चुप न रहें, बात करें और समय पर मदद लें; पूर्वांचल विश्वविद्यालय में Suicide Prevention पर जागरूकता कार्यक्रम
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के वेलनेस सेंटर ने विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक तनाव और संकट के समय सहायता लेने के लिए जागरूक किया। विशेषज्ञों ने ‘देखें, सुनें और सहायता करें’ का संदेश दिया।
जौनपुर, 11 सितंबर । वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के वेलनेस सेंटर के तत्वावधान में संगोष्ठी भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में शुक्रवार को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक तनाव और संकट की स्थिति में समय पर सहयोग लेने के प्रति जागरूक किया गया।
वेलनेस सेंटर के समन्वयक प्रो. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि मानसिक संकट के पीछे सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत समेत कई कारण हो सकते हैं। सकारात्मक वातावरण, संवेदनशील संवाद और समय पर सहयोग से संकट की स्थिति को काफी हद तक संभाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
वेलनेस सेंटर की नोडल अधिकारी डॉ. अन्नू त्यागी ने मानसिक प्राथमिक सहायता के तीन महत्वपूर्ण चरण ‘देखें, सुनें और सहायता करें’ बताए। उन्होंने कहा कि ‘देखें’ का अर्थ संकट के संकेतों को पहचानना, ‘सुनें’ का अर्थ व्यक्ति की बात को संवेदनशीलता और सहानुभूति से सुनना तथा ‘सहायता करें’ का अर्थ आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ या मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है। उन्होंने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
व्यावहारिक मनोविज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और समय पर परामर्श बेहद महत्वपूर्ण है। किसी परेशान व्यक्ति से बातचीत कर उसे भावनात्मक सहयोग देना उसके लिए महत्वपूर्ण सहारा बन सकता है।
जनसंचार विभाग के शिक्षक डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि पढ़ाई, सामाजिक अपेक्षाओं, डिजिटल माध्यमों और अन्य मानसिक दबावों का विद्यार्थियों पर असर पड़ सकता है। साइबर अपराध या ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी घटनाओं के बाद भी व्यक्ति तनाव में आ सकता है। ऐसे समय में पीड़ित को दोष देने के बजाय उसकी बात सुनना और सहयोग देना जरूरी है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।------------------