पूर्व सांसद बाहुबली उमाकांत यादव को बड़ी राहत, 6 साल 5 महीने बाद मिली सशर्त जमानत; ट्रायल में देरी पर कोर्ट सख्त
जौनपुर के पुराने भूमि फर्जीवाड़े मामले में 74 वर्षीय उमाकांत यादव को हाईकोर्ट ने जमानत दी। कोर्ट ने कहा कि करीब 30 तारीखें बीतने के बावजूद आरोप तय नहीं हुए और शीघ्र सुनवाई का अधिकार प्रभावित हुआ है।
प्रयागराज, 10 सितंबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भूमि फर्जीवाड़े के एक पुराने मामले में छह साल से अधिक समय से जेल में बंद 74 वर्षीय बाहुबली व पूर्व सांसद उमाकांत यादव को सशर्त जमानत दे दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश पारित किया।
जौनपुर के लाइन बाजार थाने में आईपीसी की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120बी के तहत दर्ज आपराधिक मामले में उमाकांत यादव पर मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि उन्होंने चकबंदी अधिकारी के साथ मिलीभगत कर ग्राम नटौली की जमीन (गाटा संख्या 525 व 534) से जुड़े राजस्व अभिलेखों (सीएच-23) में फर्जी प्रविष्टि करवाई और 26 अक्टूबर 1994 के कथित फर्जी आदेश के आधार पर अपने नाम म्यूटेशन कराया। यह उनकी दूसरी जमानत याचिका थी।
कोर्ट ने पाया कि यह विवाद मूलतः 1975 के एक बैनामे और चकबंदी अभिलेखों से जुड़ा सिविल प्रकृति का मामला है, जो पहले से ही एक याचिका हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है। कोर्ट ने कहा कि धारा 467 (जाली दस्तावेज बनाना, जिसमें उम्रकैद तक की सजा है) चकबंदी अभिलेखों पर लागू नहीं होती, क्योंकि ये मूल्यवान प्रतिभूति या वसीयत जैसे दस्तावेज नहीं हैं। इसलिए अधिकतम सात साल सजा वाली धाराओं के तहत ही मामला बनता है, और आवेदक पहले ही 6 साल 5 महीने जेल में बिता चुके हैं।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि सह-अभियुक्त सरकारी अधिकारियों की पुनरीक्षण याचिकाओं पर 2023 से रोक लगी होने के कारण ट्रायल कोर्ट में करीब 30 तारीखें बीत जाने के बावजूद आज तक आरोप तय नहीं हो पाए हैं, जो अनुच्छेद 21 के तहत शीघ्र सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल ने 77 मुकदमों के आपराधिक इतिहास का हवाला देकर जमानत का विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने कहा कि पुराना आपराधिक इतिहास अकेले जमानत रोकने का आधार नहीं बन सकता, जब तक गवाहों को डराने-धमकाने या सबूत से छेड़छाड़ की कोई ठोस आशंका न दिखाई जाए। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि आवेदक को दो अन्य दोषसिद्धि वाले मामलों में भी पूर्व में जमानत मिल चुकी है।