नई शिक्षा नीति के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों को दिया जा रहा है बढ़ावा : प्रो. विनय कुमार पाठक

नई शिक्षा नीति के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों को दिया जा रहा है बढ़ावा : प्रो. विनय कुमार पाठक

नई शिक्षा नीति के अनुरूप रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों को दिया जा रहा है बढ़ावा : प्रो. विनय कुमार पाठक

कानपुर, 31 जुलाई । नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विश्वविद्यालय में रोजगारोन्मुख, कौशल आधारित और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने के लिए पाठ्यक्रमों का लगातार आधुनिकीकरण किया जा रहा है।" यह बातें शुक्रवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने विद्या परिषद की बैठक के दौरान कहीं।

सीएसजेएमयू में शुक्रवार को सेंटर फॉर एकेडमिक में विद्या परिषद (एकेडमिक काउंसिल) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता को सुदृढ़ बनाने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नए पाठ्यक्रम लागू करने, विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने तथा शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में परिषद के सदस्य ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से शामिल हुए।

बैठक में कला, मानविकी, सामाजिक विज्ञान, कृषि विज्ञान, आधारभूत विज्ञान, पत्रकारिता एवं जनसंचार, संगीत, शिक्षा, स्वास्थ्य विज्ञान, फार्मेसी और अन्य संकायों के नए एवं संशोधित पाठ्यक्रमों पर चर्चा करते हुए उन्हें सहमति प्रदान की गई। साथ ही विभिन्न पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की मांग के अनुरूप सीटें बढ़ाने तथा आवश्यकतानुसार सीटों के पुनर्गठन के प्रस्तावों को भी अनुमोदित किया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत विश्वविद्यालय में आठ अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली। इनमें बायोटेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स, एनीमेशन एवं वीएफएक्स, गेम आर्ट एंड डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग एंड एडवरटाइजमेंट, मीडिया कम्युनिकेशन, कंटेंट एंड क्रिएटिव राइटिंग तथा रिटेल ऑपरेशंस जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शामिल हैं।

इसके अलावा साइबर सुरक्षा, एआई फॉर ऑल, फ्यूचर स्किल्स और फाइनेंशियल लिटरेसी जैसे विषयों को विभिन्न स्नातक कार्यक्रमों में शामिल करने पर भी सहमति बनी।

बैठक में विधि संकाय के प्रस्ताव पर त्रिवर्षीय एलएलबी और पंचवर्षीय बीए एलएलबी पाठ्यक्रमों में आंशिक संशोधनों को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत एग्रीगेट पासिंग प्रतिशत 45 प्रतिशत किया गया तथा छात्रों को छठे सेमेस्टर तक प्रमोशन देने और बैक पेपर बाद में देने की सुविधा प्रदान की गई। साथ ही एलएलबी की डिग्री अधिकतम छह वर्ष तथा बीए एलएलबी की डिग्री अधिकतम आठ वर्ष में पूर्ण करने का प्रावधान स्वीकृत किया गया।

बैठक में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। कॉलेज विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष तथा विद्या परिषद के सदस्य ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपस्थित रहे।