आस्था से संवर रही जिंदगी! दीपोत्सव ने अयोध्या के छोटे कारोबारियों में जगाई नई उम्मीद
-दीपोत्सव-2026 की तैयारियों के बीच अयोध्या में उत्साह के साथ रोजगार और कारोबार की भी दिख रही नई तस्वीर -कभी बैटरी रिक्शा चलाकर परिवार पालते थे जितेंद्र, राम मंदिर निर्माण के बाद अब मैग्नेटिक फोटो बेचकर रोजाना कमा रहे 600 से 700 रुपये -बिहार से आए माला-नख विक्रेता लाला महतो की रोजाना 700 से 800 रुपये की कमाई, श्रद्धालुओं की आस्था बनी आर्थिक मजबूती का आधार
अयोध्या, 06 नवंबर अयोध्या में दीपोत्सव-2026 की तैयारियों के बीच रामनगरी की रौनक केवल सड़कों, मंदिरों और घाटों तक सीमित नहीं है। इस रौनक के पीछे उन छोटे कारोबारियों की उम्मीदें भी रोशन हो रही हैं, जिनकी जिंदगी में राम मंदिर निर्माण और धार्मिक पर्यटन के विस्तार ने नए अवसर पैदा किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या को वैश्विक धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मुहिम का असर जमीन पर दिखाई देने लगा है। कभी रोजगार के लिए संघर्ष करने वाले स्थानीय लोगों से लेकर बिहार जैसे दूसरे राज्यों से यहां पहुंचे छोटे कारोबारियों तक, आस्था का यह बाजार आजीविका का मजबूत आधार बन रहा है।
इस बदलाव की सबसे दिलचस्प तस्वीर जितेंद्र की है। कभी बैटरी रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालने वाले जितेंद्र आज अयोध्या की पहचान वाले मैग्नेटिक फोटो और शोपीस बेच रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही ने उन्हें कारोबार का नया रास्ता दिखाया। अब देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटक अयोध्या की याद अपने साथ ले जाने के लिए उनसे मैग्नेटिक फोटो और स्मृति चिह्न खरीदते हैं। जितेंद्र के लिए यह बदलाव केवल पेशा बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि काम के प्रति सम्मान और भविष्य को लेकर नई उम्मीद भी है।
रिक्शे की सवारी से अपने कारोबार तक, जितेंद्र की जिंदगी में आया बदलाव
जितेंद्र ने बताया कि पहले वह बैटरी रिक्शा चलाते थे। उस समय कभी-कभी 100 से 200 रुपये कमाना भी मुश्किल हो जाता था। सड़क पर बढ़ती भीड़ और यातायात के बीच रिक्शा चलाने में परेशानी होती थी। परिवार और छोटे बच्चों की जिम्मेदारी के चलते सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती थी। कई बार रिक्शा चालकों के प्रति लोगों का व्यवहार भी उन्हें अच्छा नहीं लगता था। मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में बढ़ती गतिविधियों के बीच उन्होंने अपना काम बदलने का फैसला किया। अब वह मैग्नेट और शोपीस बेचते हैं। इस काम से प्रतिदिन 600 से 700 रुपये तक की कमाई हो जाती है। सबसे अच्छी बात यह है कि पर्यटक उनसे सम्मान के साथ बात करते हैं। अयोध्या में हुए बदलाव को 100 नहीं, बल्कि 200 प्रतिशत तरक्की बताते हैं।
बिहार से अयोध्या पहुंचे कारोबारी, आस्था के बाजार में तलाश रहे बेहतर भविष्य
अयोध्या में धार्मिक पर्यटन का विस्तार केवल स्थानीय कारोबारियों के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरे राज्यों से आए लोगों के लिए भी रोजगार का अवसर बन रहा है। बिहार के माला-नख विक्रेता लाला महतो इसका उदाहरण हैं। वह रामनगरी में कारोबार करके प्रतिदिन करीब 700 से 800 रुपये तक कमा लेते हैं। बिहार के सीतामढ़ी से आए पूजन भी यहां अपना कारोबार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक प्रतीकों और पूजन सामग्री की मांग उनके रोजगार का आधार है। बाजार में सीता माता का लॉकेट 100 रुपये और सीता हार 80 रुपये में उपलब्ध है। इसके अलावा माला, नख और अन्य धार्मिक वस्तुएं भी श्रद्धालु खरीद रहे हैं। अयोध्या के रामनरेश जैसे स्थानीय कारोबारी भी इस गतिविधि से जुड़े हैं। मंदिर में दर्शन के बाद श्रद्धालु अपने साथ रामनगरी की याद और आस्था से जुड़ी वस्तुएं ले जाना चाहते हैं। यही मांग छोटे दुकानदारों के लिए कमाई का जरिया बन रही है।
योगी सरकार की विकास नीति से धार्मिक पर्यटन को मिला नया विस्तार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या को केवल धार्मिक नगरी के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा है। मंदिर निर्माण के बाद आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, बेहतर सड़कें, सुंदरीकरण, घाटों का विकास और दीपोत्सव जैसे भव्य आयोजनों ने अयोध्या की पहचान को नई ऊंचाई दी है।