पढ़ाई तभी सार्थक, जब जाति-पांति से ऊपर उठकर मानवता को अपनाएं: आनंदीबेन पटेल
-राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 18 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए
प्रयागराज, 17 जुलाई। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में मानवता, संवेदनशीलता और समानता के मूल्यों को स्थापित करना है।
उक्त बातें शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय (यूपीआरटीओयू) प्रयागराज के 21वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहीं। उन्होंने कहा कि हम आज इतने पढ़-लिख गए हैं, लेकिन जाति-पाति से बाहर नहीं निकल पाए हैं। विद्यार्थियों से उन्होंने आह्वान किया कि वे भेदभाव से ऊपर उठकर इंसानियत को सर्वोच्च स्थान दें और अपने ज्ञान का उपयोग समाज के सकारात्मक परिवर्तन के लिए करें।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में एक प्रेरक घटना साझा करते हुए बताया कि एक गरीब सब्जी विक्रेता ने झाड़ियों में लावारिस मिली नवजात बच्ची को बिना उसकी जाति या धर्म देखे अपनाया, उसका पालन-पोषण किया और पढ़ा-लिखाकर अधिकारी बनाया। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण समाज को यह संदेश देते हैं कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है और सभी को इसी भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है कि यहां अधिकांश विश्वविद्यालयों का नाम देश के महान व्यक्तित्वों, विद्वानों और राष्ट्रनिर्माताओं के नाम पर रखा गया है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि जिन महापुरुषों के नाम पर संस्थान हैं, उनके जीवन और विचारों पर व्याख्यान, निबंध, पेंटिंग एवं संवाद जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं, ताकि विद्यार्थी उनके आदर्शों को आत्मसात कर सकें। उन्होंने बताया कि इन प्रतियोगिताओं के विजेताओं की अंतिम प्रतियोगिता राजभवन में आयोजित की जाएगी।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने 18 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किए, जिनमें 12 छात्राएं और 6 छात्र शामिल रहे। साथ ही 30,886 डिग्रियों को डिजिलॉकर पर अपलोड कर विद्यार्थियों को डिजिटल माध्यम से उपाधियां उपलब्ध कराईं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह की मुख्य अतिथि पद्मश्री एवं अन्य लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर बल देते हुए विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिनकी राज्यपाल ने सराहना करते हुए उन्हें चॉकलेट देकर उत्साहवर्धन किया। कहानी लेखन एवं भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली प्राथमिक विद्यालय की छात्राएं आराध्या साहू और परी सिंह को भी सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम, शिक्षक, अधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय का 21वां दीक्षांत समारोह शिक्षा, संस्कार, डिजिटल नवाचार और सामाजिक समरसता के संदेश के साथ प्रेरणादायी वातावरण में संपन्न हुआ।