हर बालिग को है जीवनसाथी चुनने का अधिकार : उच्च न्यायालय

हर बालिग को है जीवनसाथी चुनने का अधिकार : उच्च न्यायालय

हर बालिग को है जीवनसाथी चुनने का अधिकार : उच्च न्यायालय

प्रयागराज, 02 सितंबर। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बिजनौर की एक 22 वर्षीय विवाहित युवती को उसके पति की अभिरक्षा में सौंपते हुए स्पष्ट किया है कि बालिग होने पर हर व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने और अपने निवास स्थान का निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।

मामला बिजनौर जिले के किरतपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। याचिकाकर्ता अदित्य राठी की पत्नी अकांशा को अदालत के 17 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार और लेडी कांस्टेबल रीता द्वारा कोर्ट में पेश किया गया।

न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने युवती अकांशा से सीधे बातचीत की। उसने बताया कि वह लगभग 22 वर्ष की है, स्नातक तक शिक्षित है और उसने तीन मई 2026 को अपने परिवार की इच्छा के विरुद्ध याचिकाकर्ता अदित्य राठी से विवाह किया था। उसने अदालत को यह भी बताया कि वह किसी के अवैध निरूद्धि में नहीं है और अपनी मर्जी से पति के साथ रह रही है तथा अब वैवाहिक घर में उसी के साथ रहना चाहती है।

पति अदित्य राठी ने बताया कि वह बिजनौर की एक फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है और लगभग 15 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमाता है। उसने भी पत्नी के साथ रहने की इच्छा जताई। युवती के पिता चेतन सिंह, बेटी के इस फैसले से नाखुश दिखे लेकिन उन्होंने भी स्वीकार किया कि उनकी बेटी बालिग हो चुकी है।

कोर्ट ने कहा कि यह सुस्थापित सिद्धांत है कि एक बालिग व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने और अपने निवास का स्थान तय करने का अधिकार है। संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले इस अधिकार का प्रयोग करते हुए युवती ने अपनी मर्जी से याचिकाकर्ता को अपना जीवनसाथी चुना है।

अदालत ने युवती की अभिरक्षा उसके पति अदित्य राठी को सौंपने का आदेश दिया। साथ ही राज्य सरकार और परिवार को निर्देश दिया गया कि वे दंपति को उनके गंतव्य तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यवस्था करें। इन्हीं निर्देशों के साथ बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण कर दिया गया।