यूपी में बंदरों के आतंक पर हाईकोर्ट सख्त, समिति की कार्यशैली पर नाराज; अध्यक्षों को तलब किया
13 अधिकारियों की समिति ने 15 महीने पुरानी समस्या पर सिर्फ एक बैठक की, कार्यवृत्त भी नहीं बनाया; अब हर सप्ताह बैठक और अगली सुनवाई से पहले ठोस निर्णय का आदेश
प्रयागराज, 02 सितंबर (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रदेश में बंदरों की समस्या से निपटने के लिए बनाई गई 13 अधिकारियों की समिति की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने विनीत शर्मा व अन्य द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
राज्य सरकार ने 15 जुलाई 2026 को 13 अधिकारियों की एक समिति गठित की थी, जिसे याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रस्तावित कार्ययोजना पर विचार कर उपाय सुझाने थे। कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया था कि समिति नियमित अंतराल पर बैठकें करे और यह केवल कागजों तक सीमित न रहे, तथा बैठकों की प्रगति व कार्यवृत्त कोर्ट में रखे जाएं।
राज्य की ओर से बताया गया कि समिति की केवल एक बैठक 21 अगस्त 2026 को यानी सुनवाई से महज दस दिन पहले हुई थी, जिसमें और समय की मांग करते हुए चार सप्ताह की मोहलत मांगी गई। इसके साथ पेश उपस्थिति पत्रक से यह भी उजागर हुआ कि समिति के दोनों संयुक्त अध्यक्ष प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी उस बैठक में मौजूद ही नहीं थे।
कोर्ट ने पाया कि इस इकलौती बैठक के भी कोई कार्यवृत्त तैयार नहीं किए गए और उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर के अलावा कुछ नहीं हुआ।
पीठ ने कहा कि समिति का गठन महज आंखों में धूल झोंकने" जैसा साबित हुआ है, जिसका उद्देश्य केवल मामले में स्थगन लेना और वास्तव में कुछ न करना है। कोर्ट ने कहा कि समिति सदस्यों का यह रवैया और राज्य सरकार का कोर्ट के आदेशों के प्रति सामान्य नजरिया स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि बंदरों की यह समस्या पिछले करीब 15 महीनों से आम जनता के लिए लगातार परेशानी का सबब बनी हुई है, फिर भी अधिकारी इसे लेकर गंभीर नहीं दिख रहे।
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं:- कि समिति के सदस्य अब हर सप्ताह बैठक करेंगे और प्रत्येक बैठक का कार्यवृत्त तैयार करेंगे। अगली सुनवाई से पहले समिति को कोई ठोस निर्णय लेकर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करना होगा। यदि निर्देशानुसार बैठकें नहीं हुईं, तो प्रमुख सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग जो समिति के संयुक्त अध्यक्ष हैं , को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा। राज्य के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को आज पारित आदेश की जानकारी सभी संबंधित पक्षों को देने का निर्देश दिया गया है।मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को होगी।