इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा बरकरार रखी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में 10 साल की सजा बरकरार रखी
प्रयागराज, 27 अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म केस में पदम सिंह उर्फ पदमी की दस साल की सजा बरकरार रखी है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद ने सजा के खिलाफ अपील खारिज कर दी है। 20 फरवरी 2016 को अपर सत्र न्यायाधीश, गाजियाबाद ने सजा सुनाई थी।
पूरा परिवार पड़ोस में देवी जागरण देखने गया था। सुबह 04 बजे लौटे तो भतीजी गायब मिली। पूछने पर पता चला कि आरोपी पदम सिंह शादीशुदा, 3 बच्चों का बाप, दूर का मामा बहला-फुसलाकर ले गया है।
आरोपी ने कहा - पत्नी से झगड़ा है। इससे शादी करूंगा । रात 3 बजे फरीदाबाद ले गया था। कमरा किराए पर लिया था। पत्नी बताकर रखा। कोर्ट ने कहा उम्र हाईस्कूल सर्टिफिकेट से 16 साल साबित है। सी एम ओ जांच ने 18 साल बताया। पीड़िता का बयान साफ है कि पहले भी ले गया था, दूसरी बार शादी के झांसे में फरीदाबाद ले जाकर 12-13 दिन कमरे में रखा और रोज दुष्कर्म किया। कोर्ट ने कहा मेडिकल में चोट व वीर्य न पाया जाना, एफआईआर दर्ज करने में देरी, विश्वसनीय बयान को खारिज नहीं कर सकते। कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। पदम सिंह उर्फ पदमी जमानत पर है उसे 15 दिन में ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।